श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘बारिश की बूंदे…‘।)
☆ शशि साहित्य # ३० ☆
कविता – बारिश की बूंदे… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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छम छम करके बरसें बूंदे,
नाचे जैसे संग सितार…
मन नाच रहा संग में,
सुनकर राग मल्हार…
सर से अपने हटा के छतरी,
सुन लो मेघों की प्रेम पुकार…
भीग जाने दो तन को,
मन को हो जाने दो तर,
लंबा रास्ता तय कर आई बरखा,
तुमसे मिलने, धर बूंदों का आकार…
बहुत समय तक तरसे नैना,
तब जाकर हुआ दीदार…
साकार होते देख लो,
अब अपना यह इंतजार…
कुछ अपनी कहो, कुछ उनकी सुनो…
मन की बातें करो हज़ार…
बसा के माटी की भीनी खुशबू…
सांस महक, हो जाए खुशगवार…
छमक कर लाई, प्रीत संदेशा,
जैसे हरसू बरसे,
खुशियों का उपहार…
हटा के छतरी, गले लगा लो,
स्वीकार करो यह अमोल बौछार…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





