सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – हे राम धरा पर आ जाओ…।
रचना संसार # १०२ – गीत – हे राम धरा पर आ जाओ… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
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हे राम धरा पर आ जाओ,
प्रभु फिरती अकुलाई।
खोई है मानवता जग ने,
कली-कली मुरझाई।।
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दानवता प्रभु खूब बढ़ी है,
रक्षक बनकर आओ।
संस्कारों को भूल गए सब,
आकर नाथ सिखाओ।।
समरसता का पाठ पढ़ा दो,
दूर करो कठिनाई।
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भ्रष्टाचारी पनप रहे हैं,
भ्रष्टाचार मिटादो।
भय से हीन जगत् हो सारा,
अत्याचार हटादो।।
अंत करो मन के रावण का,
हर उसकी परछाई।
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राह प्रगति की खोलो सारी,
हो संस्कृति संस्थापक।
पोषित कर दो धर्म सनातन,
प्रभु हो शांति उपासक।।
राम राज्य फिर से आ जाए,
सुरभित हो अँगनाई।
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रघुकुल रीति निभाने वाले,
प्रभु हो अन्तर्यामी।
तकती राह अहल्या फिर से,
दे दो दर्शन स्वामी।।
कलियुग के सब कलुष दूर हों,
मुक्तिधाम रघुराई ।
*
विनती करते रघुकुल भूषण,
शरणागत आते हैं।
वंदन अभिनंदन हैं प्रभुजी,
रामचरित गाते हैं।।
करुणानिधि सुख के सागर हो,
समय बड़ा दुखदाई।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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