डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “राखी…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ४३
कविता – राखी… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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रिश्तों की मनभावन तरंग राखियाँ
सावन की पावन उमंग राखियाँ
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लाई है बहना शुभ रिश्तों की डोरी
सजती कलाइयों पे नवरंग राखियाँ
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संकट में जब बहन हो चमत्कार देखिए
बन जाया करती केशरी बजरंग राखियाँ
=4=
बंधन साहस का,जब भी बाँधती बहना
लड़ती हैं फ़िर सरहद पर जंग राखियाँ
=5=
अनमोल अनोखा है ‘ राजेश ‘ये रिश्ता
मधुरिम उत्सव की ये मृदंग राखियाँ
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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