श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – हिंदी दिवस।)
☆ लघुकथा # १२९ – हिंदी दिवस ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
हिंदी दिवस पर विद्यालय में विशेष समारोह था। मंच पर हिंदी के सम्मान में भाषण हो रहे थे।
शिक्षक ने छात्र से कहा—
“आज हिंदी दिवस है, हिंदी में ही बात करना।”
छात्र ने पूछा—
“सर, आज ही क्यों?”
“क्योंकि आज हिंदी दिवस है।”
छात्र मुस्कराया—
“तो बाकी दिन किसके हैं?”
शिक्षक निरुत्तर हो गए।
छात्र ने फिर पूछा—
“सर, हिंदी को सम्मान भाषणों से मिलेगा या व्यवहार से?”
शिक्षक ने कहा—
“व्यवहार से।”
“तो फिर हम इसे सिर्फ आज क्यों निभाएँ?”
शिक्षक के पास कोई उत्तर नहीं था।
तभी मंच से घोषणा हुई—
“अब हिंदी दिवस पर हिंदी के महत्व पर भाषण दे रहे थे ।”
छात्र ने मंच की ओर देखा और धीमे से कहा—
“सर, हिंदी को आज फिर वही मिला—सम्मान का भाषण और व्यवहार में छुट्टी।”
तालियाँ गूँज उठीं।
शिक्षक चुप थे।
मंच पर हिंदी का सम्मान हो रहा था और मंच से उतरते ही हिंदी फिर अपने घर का रास्ता खोज रही थी।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






