श्री यशोवर्धन पाठक

☆ संस्मरण ☆

☆ सुप्रसिद्ध चित्रकार और शिक्षाविद स्मृतिशेष कामता सागर जी ☆ श्री यशोवर्धन पाठक ☆

(राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत)

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तिथियां गिने न बैठो, उत्थान और पतन की,

सच मानो ये घड़ी है, संकल्प और प्रण की।

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सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्व. पं. श्रीबाल पांडेय जी की उपरोक्त काव्य पंक्तियों की सार्थकता सिद्ध करने वाले माडल हाई स्कूल जबलपुर के पूज्य गुरुवर एवं राष्ट्रीय स्तर पर सुप्रसिद्ध चित्रकार स्वर्गीय श्री कामता सागर जी की १० अक्जटूबर को जयंती थी. स्व कामता सागर जी कला के लिए समर्पित एक ऐसे चित्रकार थे जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति अर्जित की और माडल हाई स्कूल सहित संस्कारधानी को कला और शिक्षा जगत में गौरवान्वित किया था। अपने शिक्षकीय कार्यकाल में कला शिक्षक के रुप में न जाने कितने छात्रों को उन्होंने अत्यंत दक्षता के साथ चित्रकारिता सिखायी और उन छात्रों ने भी बाद में एक कुशल चित्रकार के रुप में स्कूल को गौरवान्वित किया।

यह सर्वविदित है कि स्व कामता सागर जी की चित्रकला के प्रति अत्यंत व्यापक और गहरी सोच थी और यही कारण था कि अनेक कलात्मक संस्थाओं में उनका मार्गदर्शन और सहभागिता महत्वपूर्ण मानी जाती थी। राष्ट्रीय स्तर की पत्र पत्रिकाओं में उनके चित्र प्रमुखता से प्रकाशित होते थे। एक बार जब साप्ताहिक हिंदुस्तान में उनका एक कलात्मक चित्र प्रमुखता से प्रकाशित हुआ तो मैंने बधाई देते हुए उनसे पूछा कि सर, आपको कैसा लगा रहा है। तब उन्होंने जो कहा वह मुझे आज तक याद है। उन्होंने कहा कि उपलब्धियों पर गर्व नहीं करना चाहिए बल्कि आगे के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए। यहां तक कि उनकी इसी कलात्मक प्रतिभा के कारण उन्हें विदेश यात्रा का भी अवसर मिला लेकिन परिवार में अप्रत्याशित घटना के कारण उनको यह यात्रा निरस्त करना पड़ी।

स्मरणीय है कि मेरे प्राचार्य काल में सहकारी प्रशिक्षण केन्द्र जबलपुर में एक आयोजन में हमने आदरणीय कामता सागर जी को सम्मानित करने जब सादर आमंत्रित किया तब उन्होंने कहा था कि मैं सम्मानित किए जाने के पक्ष में नहीं हूं। सम्मानित किए जाने से व्यक्ति का आगे बढ़ना रुक जाता है और वह अपने आप को सम्पूर्ण समझने लगता है। श्री कामता सागर जी हमारे केन्द्र में पधारे जरुर लेकिन अतिथि के रुप में नहीं बल्कि एक ऐसे गुरु तुल्य वक्ता के रूप में जिनके सारगर्भित उद्बोधन और मार्गदर्शन से हमारे प्रशिक्षार्थी वास्तव में लाभान्वित हुए थे। आयोजन में उन्होंने सहकारिता के विकास में चित्रकारिता की भूमिका पर सारगर्भित भाषण दिया था।

उनके विचार और उनकी स्मृतियाँ हमारे लिए सदा प्रेरणा दायक रहेंगे।

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© श्री यशोवर्धन पाठक

पूर्व प्राचार्य, राज्य सहकारी प्रशिक्षण संस्थान, जबलपुर

संपर्क – डा. मिली गुहा अस्पताल के पीछे, गुप्तेश्वर, जबलपुर, मोबाइल 9407059752

≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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