श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १९८ ☆ देश-परदेश – International Artist Day:25 Oct ☆ श्री राकेश कुमार ☆
कलाकार, चित्रकार, गुणी व्यक्ति सब इसी श्रेणी में आते हैं। कलाकार में भी संगीत, नाटक, लेखन आदि बहुत सारी अलग अलग क्षेत्र हैं। ये सभी लोग साधक भी कहलाते हैं।
वर्त्तमान में गूगल, ए आई जैसी सुविधाएं बहुत सारी कलाओं की महत्ता कम करने में योगदान दे रहीं हैं। विज्ञान मानव की क्षमताओं पर निर्भरता दिन प्रतिदिन कम कर रहा हैं।
एक छोटा सा उदाहरण साइन बोर्ड का ही लेते हैं। पूर्व में पेंटर हाथ से बोर्ड पर पूरा लिख देता था। अब फ्लेक्स प्रिंट सुविधा, घंटो का कार्य कुछ मिनिट में पूरा कर देता है। इसी प्रकार से मनोरंजन के लिए फिल्मों में ग्राफिक्स का उपयोग बहुत बढ़ गया है। लेखन का कार्य भी मेटा, ए आई जैसी सुविधाएं मानव से जल्द और त्रुटि रहित कर देते हैं। दिमाग का उपयोग भी अब जानकारी आदि के लिए के स्थान पर गूगल आ चुका है।
आम बोलचाल की भाषा में भी हम लोग ‘कलाकार’ शब्द का उपयोग गाजे बाजे के साथ करते रहते हैं। किसी व्यक्ति को कलाकार कहने से तात्पर्य ये होता है, कि वह व्यक्ति साम, दाम, दंड, भेद से कोई भी कार्य पूर्ण करने में सक्षम होता है। इस प्रकार के लोग बिना श्रम किए, प्रसिद्धि प्राप्त करने में माहिर होते हैं।
व्हाट्स ऐप पर भी बहुत प्रकार के कलाकार पाए जाते हैं। ग्रुप में रहते हुए सबसे पहले किसी भी मैसेज को पढ़ कर कोई प्रतिक्रिया ना देते हुए, बगुला भगत की तरह शांत रहना। एक और प्रकार के कलाकार दूसरे द्वारा शेयर किए गए मैसेज पर अपना नाम लिख कर आगे प्रेषित करना भी एक अच्छी कला है।
गूगल के मैटर में थोड़ा सा बदलाव कर लेखक बनना भी एक कला ही तो है। इस विषय पर तो पूरी किताब भी लिखी जा सकती हैं।
© श्री राकेश कुमार
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