श्री संजय भारद्वाज
(श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही गंभीर लेखन। शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं। हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ सकते हैं। )
☆ संजय दृष्टि ☆ फिर चुप्पी ☆
कर्कश कोलाहल
जम चुका चुप्पी में,
चुप्पी फूट रही है
कर्णकटुता के साथ,
कोई विज्ञान को बताओ,
केवल पानी और बर्फ ही
‘इंट्रा ट्रांसफॉर्मेशन’ का
उदाहरण नहीं होते!
© संजय भारद्वाज
रात्रि 10:42 बजे, 3.9.2020
मोबाइल– 9890122603






अच्छी रचना
चुप्पी फूट पड़ी बर्फ और पानी की तरह –
कर्कश कोलाहल ,कर्णकटुता शब्द प्रयोग द्वारा चुप्पी के फूटने की अद्भुत अभिव्यक्ति –
निःशब्द करती
एक विलक्षण अनुभूति रचनाकार की शब्द शैली को प्रस्फुटित करती हई – साधुवाद