श्री जगत सिंह बिष्ट

(Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker.)

(ई-अभिव्यक्ति के “दस्तावेज़” श्रृंखला के माध्यम से पुरानी अमूल्य और ऐतिहासिक यादें सहेजने का प्रयास है। श्री जगत सिंह बिष्ट जी (Master Teacher: Happiness & Well-Being, Laughter Yoga Master Trainer, Author, Blogger, Educator, and Speaker) के शब्दों में  “वर्तमान तो किसी न किसी रूप में इंटरनेट पर दर्ज हो रहा है। लेकिन कुछ पहले की बातें, माता पिता, दादा दादी, नाना नानी, उनके जीवनकाल से जुड़ी बातें धीमे धीमे लुप्त और विस्मृत होती जा रही हैं। इनका दस्तावेज़ समय रहते तैयार करने का दायित्व हमारा है। हमारी पीढ़ी यह कर सकती है। फिर किसी को कुछ पता नहीं होगा। सब कुछ भूल जाएंगे।”

दस्तावेज़ में ऐसी ऐतिहासिक दास्तानों को स्थान देने में आप सभी का सहयोग अपेक्षित है। इस शृंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है श्री जगत सिंह बिष्ट जी का एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ मंत्री महोदय की यमलोक में छवि।) 

☆  दस्तावेज़ # ३२ – 🌚 मंत्री महोदय की यमलोक में छवि 🌚 श्री जगत सिंह बिष्ट ☆ 

(अगस्त 1990.  प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह की सरकार जा रही थी और चंद्रशेखर जी भारत के नए प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण कर रहे थे। दोनों ही मंत्रिमंडल में चौधरी देवीलाल, उप-प्रधानमंत्री के रूप में, शोभायमान थे। राजनीतिक उथलपुथल का समय था। इस पृष्ठभूमि में, यह रचना, आज से लगभग पैंतीस वर्ष पूर्व, लिखी गई थी।)

वयोवृद्ध मंत्री महोदय गहरी नींद में सो रहे थे। मंत्रिमंडल पर छाए संकट के बादल हट गए थे। मध्यावधि चुनाव दो-चार महीनों के लिए टल गए थे।

उनका अचेतन मन एक रंग-बिरंगी स्वप्न श्रृंखला में खो गया। ‘जिंदाबाद’ के गगनभेदी नारों के बीच, वे लाखों किसानों की विशालकाय रैली को संबोधित कर रहे हैं। चारों दिशाओं में उनकी जय-जयकार गूंज रही है।

अपने चहते बेटे को उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान देखा। राजभवन की शोभा बढ़ाते हुए अपने दामाद को देखा। लेकिन यह क्या? बीच में फूलों से सजी यह तोपगाड़ी कहां से आ टपकी? सपने का सारा आनंद जाता रहा।

उन्हें महसूस हुआ कि कोई उनकी बांह पकड़कर, उन्हें खींचने का प्रयास कर रहा है। उनकी आंखों में अब भी हल्का-हल्का सुरूर था। उन्नींदे स्वर में, वे बड़बड़ाए, “कौन है?”

“यमदूत!” जवाब में भारी-भरकम आवाज सुनकर मंत्री महोदय चौंके।

आंखों को मलते हुए उन्होंने खोलने का प्रयत्न किया। देखते क्या हैं कि एक भयावह काली आकृति, उनके भारी शरीर को खींचने का प्रयास कर रही है।

उन्होंने कड़क कर पूछा, “इस वक्त क्या काम है?”

यमदूत बोला, “आपको यमलोक चलना होगा।”

मंत्री महोदय ने प्रश्न किया, “वहां तक जाने के साधन का प्रबंध कर लिया है?”

यमदूत ने कहा, “खिड़की के बाहर देखिए!”

बाहर एक जीर्ण-क्षीर्ण काले रंग का छोटा-सा विमान खड़ा था। उसे हिकारत से देखते हुए मंत्री महोदय ने कहा, “जाकर, कह देना यमराज से, हम दूसरे का मातम मनाने भी एयरबस से जाते हैं। इस टूटे-फूटे जहाज में बैठने हमारी शान के खिलाफ है। और, अभी मध्यावधि चुनाव से पहले, हमें फुर्सत भी नहीं है।”

यह सुनकर यमदूत सकते में आ गया। उसे कमज़ोर पाकर, अनुभवी मंत्री जी ने प्यार से उसका कंधा थपथपाया। फिर कहा, “तू कबसे यह मशक्कत का काम कर रहा है? अब तो तेरी उम्र भी ढलने लगी है। चल, छोड़ दे अब ये गंदा काम। कल सुबह आकर मुझसे मिलना। गवर्नर-शवर्नर लगवा दूंगा।”

यमदूत थोड़ा ढीला पड़ गया। धीरे से बोला, “अभी तो मेरा पॉलिटिकल कैरियर शुरू भी नहीं हुआ और आप हैं कि मुझे ठिकाने से लगा देना चाहते हैं।”

मंत्री महोदय बोले, “पॉलिटिक्स करने का इतना ही शौक है तो वहां जाकर भी कर सकता है। तुझे रोकता कौन है? अभी रात काफी हो गई है, तू भी थका होगा, बाहर बेंच पर थोड़ा आराम कर ले। सुबह देखेंगे।”

अब भी उसकी शंका का समाधान नहीं हुआ था। हिचकिचाते हुए बोला, “आपके मंत्रिमंडल का क्या भरोसा? कल को सरकार बदल गई तो मेरा क्या होगा? मैं न घर का रहूंगा, न घाट का!”

मंत्री जी बोले, “तू इसकी फ़िक्र मत कर। अगर सरकार बदल भी जाएगी तो मेरी पोजीशन में फर्क नहीं आने वाला। सरकारें गिराने वाला भी मैं हूं और बनाने वाला भी।”

यमदूत आश्वस्त होकर सो गया। अगली सुबह, एक विशेष विमान से वह रवाना हुआ।

फूलों की मालाओं से, राजभवन में ‘उनका’ भव्य स्वागत हुआ। राज्य के मुख्यमंत्री विशेष प्रसन्न लग रहे थे। उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की घोषणा की।

महामहिम राज्यपाल, पूरी राजकीय शान से, विधानसभा की ओर रवाना हुए। वहां असंतुष्ट विधायकों ने उनका रास्ता रोक लिया और “राज्यपाल वापस जाओ” के नारे लगाए। वे घबरा गए। धक्का-मुक्की होने लगी। भीड़ में से किसी ने उनकी टोपी उड़ा ली। उन्होंने वापस जाना ही श्रेयस्कर समझा।

शाम की फ्लाइट से वे वापस मंत्री महोदय के पास पहुंचे और बोले, “यह काम हमारे बस का नहीं। हम तुरन्त इस्तीफ़ा दे रहे हैं।”

मंत्री जी के होठों पर कुटिल मुस्कान लहरा रही थी। बोले, “तू तो बहुत जल्दी घबरा गया। अभी तो तूने एक मुख्यमंत्री को भी बर्खास्त नहीं किया। इतनी जल्दी तू इस्तीफ़ा नहीं दे सकता। हमारी सरकार की इमेज बिगड़ेगी। जा, तू आराम कर।”

उधर यमलोक में, जब पता चला कि एक यमदूत गायब है तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। उसे ढूंढकर वापस लाया गया। ‘कारण बताओ’ नोटिस दिया गया। दो-चार कोड़े लगाए गए। आखिर, उसने सत्य उगल दिया।

सुनकर, यमराज के नेत्र क्रोध से लाल हो गए। उन्होंने तुरन्त चार हट्टे-कट्टे और विश्वसनीय यमदूतों को मंत्री महोदय को उठा लाने के लिए ‘डिप्यूट’ किया।

यह देखकर, दर्द से कराहता यमदूत चीख उठा, “गुस्ताखी माफ हो हुजूर! छोटा मुंह, बड़ी बात। आपका नामक खाया है, मालिक! मेरी सलाह मानें तो मंत्री महोदय जहां हैं, उनको वहीं रहने दें। उनका यहां आना, आपके हित में नहीं।”

पास ही खड़े, भयावह भैंसे ने जोरदार हुंकार से इसका समर्थन किया!

♥♥♥♥

© जगत सिंह बिष्ट

Laughter Yoga Master Trainer

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A Pathway to Authentic Happiness, Well-Being & A Fulfilling Life! We teach skills to lead a healthy, happy and meaningful life.

The Science of Happiness (Positive Psychology), Meditation, Yoga, Spirituality and Laughter Yoga. We conduct talks, seminars, workshops, retreats and training.

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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2 Comments
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Hemant Tarey
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सटीक 😂

जगत सिंह बिष्ट
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धन्यवाद, तारे साहब!
🙏🙏