कविराज विजय यशवंत सातपुते

? कवितेचा उत्सव # 260 – विजय साहित्य ?

☆ गुरू….!

दत्तात्रेय गुरू |

करीती प्रवास ||

अनुभूती खास |

निजरुपी…! ||१||

*

आकाश निर्मळ |

अलिप्त अचळ ||

स्नेहरुपी बळ |

पाणी देई…! ||२||

*

पंचमहाभूते |

तेची गुरूरुप ||

कंकण स्वरुप |

गुणातीत…! ||३||

*

चंद्र ,सूर्य, मृग |

सर्प, मत्स्य, कोळी ||

शरकर्ता झोळी |

गुरु ठायी…! ४

*

सागर,पतंग |

असो अजगर ||

मधुहा ,भ्रमर |

ज्ञानकण…! ||५||

*

कपोत, गजेंद्र |

टिटवी ,बालक ||

पिंगला, पालक |

गुरु तत्व…! ||६||

*

कविराज शब्दी |

वर्णियेला गुरू ||

ज्ञानार्जन सुरू |

पदोपदी…! ||७||

© कविराज विजय यशवंत सातपुते

सहकारनगर नंबर दोन, दशभुजा गणपती रोड, पुणे.  411 009.

मोबाईल  8530234892/ 9371319798.

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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