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(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई की स्मृति – परसाई जी समाज के डाक्टर थे साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार

जबलपुर l देश की ख्यातिलब्ध संस्था जबलपुर व्यंग्यम (अपंजीकृत) द्वारा “व्यंग्य पुरोधा हरिशंकर परसाई जी” की स्मृति में मेरी दृष्टि में “हरिशंकर परसाई व्याख्यान माला” का आयोजन जानकीरमण महाविद्यालय में आयोजित किया गया जिसमें डॉ. कुंदन सिंह परिहार ने उनकी साथ के अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि “परसाई को जानना है तो उनका पूरा साहित्य पढ़ना चाहिए जिससे समाज में व्याप्त विसंगतियों की जानकारी हो सकेगी. परसाई जी व्यंग्य के दीपक स्तंभ है जो निडरता से बुराइयों पर प्रहार करने की दृष्टि और शक्ति प्रदान करते है.” इस व्याख्यान माला में देश के उद्भट व्यंग्यकार सर्वश्री अभिमन्यु जैन, शरद जोशी सम्मान से सम्मानित सुरेश विचित्र, आचार्य विजय तिवारी किसलय, रमाकांत ताम्रकार, राकेश सोहम, विजय विश्वकर्मा, विनोद खंडालकर ने उक्त  आशय के विचार व्यक्त किए.

दूसरे सत्र में व्यंग्य गोष्ठी का आयोजन हुआ जिसमें आचार्य विजय तिवारी किसलय ने धूपगांव का अपग्रेडेड लड़का, रमाकांत ताम्रकार ने अस्पताल का चक्कर, सुरेश मिश्रा विचित्र ने मुख्य अतिथि की पीड़ा, अभिमन्यु जैन ने भोजन और विमोचन, राकेश सोहम ने राशन में मिले डाटा, विनोद खंडालकर ने सावधान! आगे हैलमेट चेकिंग चालू आहे, डॉ कुंदन सिंह परिहार जी ने भाई हिम्मत लाल का संकट और विजय विश्वकर्मा ने समाधि से सम्भोग की ओर का वाचन किया.

कार्यक्रम का संचालन श्री राकेश सोहम ने तथा आभार प्रदर्शन श्री अभिमन्यु जैन ने किया.

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साभार – श्री रमाकांत ताम्रकार, जबलपुर  

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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