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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – चुभता हुआ सत्य (ईबुक) – हेमन्त बावनकर 

चुभता हुआ सत्य (ईबुक) – हेमन्त बावनकर  आत्मकथ्य - यह उपन्यासिका मेरी पहली कहानी ‘चुभता हुआ सत्य’ पर आधारित है। यह कहानी दैनिक नवीन दुनिया, जबलपुर की साप्ताहिक पत्रिका ‘तरंग’ के प्रवेशांक में 19 जुलाई 1982 को डॉ. राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’ जी के साहित्य सम्पादन में प्रकाशित हुई थी। इस उपन्यासिका का कथानक एवं कालखंड अस्सी-नब्बे के दशक का है। अतः इसके प्रत्येक पात्र को विगत 36 वर्ष से हृदय में जीवित रखा। जब भी समय मिला तभी इस कथानक के पात्रों  को अपनी कलम से उसी प्रकार से तराशने का प्रयत्न किया, जिस प्रकार कोई शिल्पकार अपने औजारों से किसी शिलाखण्ड को वर्षों तराश-तराश कर जीवन्त नर-नारियों की मूर्तियों का आकार देता है, मानों वे अब बोल ही पड़ेंगी। सबसे कठिन कार्य था, एक स्त्री पात्र को लेकर आत्मकथात्मक शैली में उपन्यासिका लिखना। संभवतः किसी लेखिका को भी एक पुरुष पात्र को लेकर आत्मकथात्मक शैली में लिखना इतना ही कठिन होता होगा। इन पात्रों की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझते हुए...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – एहसासों के मोती  – डॉ दिवाकर पोखरियाल 

आत्मकथ्य – एहसासों के मोती  – डॉ दिवाकर पोखरियाल  इस काव्य संग्रह ‘एहसासों के मोती’ की हर कविता, कवि के दिल के बहुत करीब है| १६ पुस्तके प्रकाशित होने के बाद अब यह डॉ दिवाकर पोखरियाल की १७ वी पुस्तक है परंतु हर बार जब भी कोई नयी पुस्तक प्रकाशित होती है तो उनको वही खुशी और वही रोमांच का एहसास मन में रहता है जो प्रथम पुस्तक के प्रकाशित होने में होता है| हाल ही में इनका प्रथम हिन्दी उपन्यास 'सपने सच और उड़ान’ प्रकाशित हुआ और उससे पहले काव्य संग्रह 'मेरी कविता' प्रकाशित हुआ| इन दोनो पुस्तकों के प्रकाशित होने पर भी उन्हे उसी नयी सुफूर्ति एवं खुशी का एहसास हुआ जो इस पुस्तक में हो रहा है| डॉ दिवाकर का कहना है की शायद अब वह यह जान सकते है कि क्यूँ एक माँ के लिए उसका हर एक बच्चा प्यारा होता है| इस काव्य संग्रह में कवि ने एहसासों को मोतियों सा पिरोने की कोशिश की है| यह एहसास कविता...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – सेकंड चान्स  – डॉ संदीप जटवा  

आत्मकथ्य – सेकंड चान्स  – डॉ संदीप जटवा     (प्रस्तुत है डॉ संदीप जटवा के उपन्यास "सेकंड चान्स" जिसमें व्यवसायी शेखर के जीवन परिवर्तन की कहानी निहित है। संभव है यह उपन्यास आपका जीवन परिवर्तित कर दे और आपको जीवन के सार से अवगत करा दे। यह कहानी है प्रेम की, जीवन की; पिता और पुत्र की; दूसरों के लिए जीवन जीने की, जीवन में कर्म की महत्ता की और अंत में एक मानव जीवन की।) पुस्तक समीक्षा/सार  उसे नहीं पता था कि उसकी मृत्यु उसकी जिंदगी बदल सकती है। “सेकंड चान्स” एक अहंकारी व्यापारी शेखर कपूर की भावनात्मक और विचार-विमर्शकारी कहानी है। शेखर एक ऐसा आदमी है जिससे आप कभी नहीं मिलना चाहेंगे। वह पूरी दुनिया में किसी का सम्मान नहीं करता है। वह स्वार्थी, असंवेदनशील है और उसके पास कोई नैतिक मूल्य नहीं है। वह अरबपति है लेकिन वह नहीं जानता कि जीवन क्या है? वह अपने लकवाग्रस्त पिता से पिछले दस साल से बात नहीं कर रहा है और उसके पास "परिवार"...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – पंचमढ़ी की खोज – श्री सुरेश पटवा

आत्मकथ्य – पंचमढ़ी की खोज – श्री सुरेश पटवा  (‘पंचमढ़ी की खोज’  श्री सुरेश पटवा की प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है। आपका जन्म देनवा नदी के किनारे उनके नाना के गाँव ढाना, मटक़ुली में हुआ था। उनका बचपन सतपुड़ा की गोद में बसे सोहागपुर में बीता। प्रकृति से विशेष लगाव के कारण जल, जंगल और ज़मीन से उनका नज़दीकी रिश्ता रहा है। पंचमढ़ी की खोज के प्रयास स्वरूप जो किताबी और वास्तविक अनुभव हुआ उसे आपके साथ बाँटना एक सुखद अनुभूति है।  श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आप अभी अपनी नई पुस्तक ‘पलक गाथा’ पर काम कर रहे हैं। प्रस्तुत है उनकी पुस्तक पंचमढ़ी की खोज पर उनका आत्मकथ्य।) मध्यप्रदेश के होशंगाबाद...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – ग़ुलामी की कहानी – श्री सुरेश पटवा 

आत्मकथ्य - ग़ुलामी की कहानी - श्री सुरेश पटवा  ('गुलामी की कहानी'  श्री सुरेश पटवा की प्रसिद्ध पुस्तकों में से एक है। आपका जन्म देनवा नदी के किनारे उनके नाना के गाँव ढाना, मटक़ुली में हुआ था। उनका बचपन सतपुड़ा की गोद में बसे सोहागपुर में बीता। प्रकृति से विशेष लगाव के कारण जल, जंगल और ज़मीन से उनका नज़दीकी रिश्ता रहा है। पंचमढ़ी की खोज के प्रयास स्वरूप जो किताबी और वास्तविक अनुभव हुआ उसे आपके साथ बाँटना एक सुखद अनुभूति है।  श्री सुरेश पटवा, ज़िंदगी की कठिन पाठशाला में दीक्षित हैं। मेहनत मज़दूरी करते हुए पढ़ाई करके सागर विश्वविद्यालय से बी.काम. 1973 परीक्षा में स्वर्ण पदक विजेता रहे हैं और कुश्ती में विश्व विद्यालय स्तरीय चैम्पीयन रहे हैं। भारतीय स्टेट बैंक से सेवा निवृत सहायक महाप्रबंधक हैं, पठन-पाठन और पर्यटन के शौक़ीन हैं। वर्तमान में वे भोपाल में निवास करते हैं। आप अभी अपनी नई पुस्तक 'पलक गाथा' पर काम कर रहे हैं। प्रस्तुत है उनकी पुस्तक गुलामी की कहानी पर उनका आत्मकथ्य।) यह...
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पुस्तक समीक्षा : काव्य संग्रह – अन्तर्ध्वनि – – सुश्री मालती मिश्रा

अन्तर्ध्वनि (काव्य-संग्रह) लेखिका : सुश्री मालती मिश्रा प्रकाशन :     उन्वान  प्रकाशन मूल्य : रुपये 150/- मात्र समीक्षक : अवधेश कुमार 'अवध' (पुस्तक समीक्षा/आत्मकथ्य की इस कड़ी में हम सुश्री मालती मिश्रा जी के काव्य-संग्रह  अन्तर्ध्वनि की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। समीक्षा श्री अवधेश कुमार ‘अवध’ जी ने लिखी है। हम कल इस काव्य संग्रह की एक चुनिन्दा  कविता प्रकाशित करेंगे। ) मनुष्यों में पाँचों इन्द्रियाँ कमोबेश सक्रिय होती हैं जो अपने अनुभवों के समन्वित मिश्रण को मन के धरातल पर रोपती हैं जहाँ से समवेत ध्वनि का आभास होता है, यही आभास अन्तर्ध्वनि है। जब अन्तर्ध्वनि को शब्द रूपी शरीर मिल जाता है तो काव्य बन जाता है। सार्थक एवं प्रभावी काव्य वही होता है जो कवि के हृदय से निकलकर पाठक के हृदय में बिना क्षय के जगह पा सके और कवि - हृदय का हूबहू आभास करा सके। नवोदित कवयित्री सुश्री मालती मिश्रा जी ने शिक्षण के दौरान अन्त: चक्षु से 'नारी' को नज़दीक से देखा। नर का अस्तित्व है नारी, किन्तु वह नर के कारण अस्तित्व विहीन...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – सपने, सच और उड़ान – डॉ दिवाकर पोखरियाल 

  आत्मकथ्य – सपने, सच और उड़ान - डॉ दिवाकर पोखरियाल  (अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) पृष्ठभूमि से संबन्धित एवं ऊर्जा (एनर्जी) में पी. एच डी कर चुके डॉ . दिवाकर पोखरियाल का साहित्य एवं गीत-संगीत में रुझान उनकी सर्वांगीण प्रतिभा का परिचायक है। आपकी विशिष्ट साहित्यिक प्रतिभा के कारण आपका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रेकॉर्ड्स – 2014 एवं  2017’ में दर्ज है। हम ऐसे प्रतिभाशाली व्यक्तित्व को आपसे रूबरू करने में गौरवान्वित अनुभव करते हैं।प्रस्तुत है उनके  उपन्यास 'सपने, सच और उड़ान' का आत्मकथ्य एवं उसका एक अंश उनकी ही कलम से।) पहले भाग में ( जो पहले 5 पाठ है) 5 बच्चे समाज से अलग अलग हिस्से से अपने सपनो के लिए अपनो से लड़ते है|  उस सोच का हिस्सा है जहाँ माँ बाप बच्चो का भविष्य निर्धारित करते है ना कि खुद बच्चे अपनी काबिलियत के हिसाब से| रितिका उन लड़कियो में से है जो प्यार के चक्कर में बहुत जल्दी फँस जाने के कारण अंदर से भावनात्मक हो जाते है और उस एहसास...
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पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य – इंतज़ार (कहानी संग्रह) – सुश्री मालती मिश्रा

इंतज़ार (कहानी संग्रह) लेखिका : सुश्री मालती मिश्रा प्रकाशन : समदर्शी प्रकाशन, हरियाणा संस्करण : प्रथम, जून - 2018 मूल्य : रुपये 175/- मात्र (लेखक मित्रों के सुझावों के अनुरूप यह एक नवीन प्रयास है। इसमें लेखक मित्रों की चुनिन्दा पुस्तकों की समीक्षा/आत्मकथ्य प्रकाशित करना प्रारम्भ कर रहे हैं। इस कड़ी में हम सर्वप्रथम सुश्री मालती मिश्रा जी के कथा संग्रह इंतज़ार की समीक्षा प्रस्तुत कर रहे हैं। समीक्षा श्री अवधेश कुमार 'अवध' जी ने लिखी है। हम कल इस कथा संग्रह की एक चुनिन्दा कहानी 'इंतजार का सिलसिला' प्रकाशित करेंगे।  अवधेश कुमार 'अवध' जब से मानव ने कुटुम्ब में रहना सीखा तब से परिजनों में छोटे - बड़े और बच्चे - वृद्ध की भावना आई और साथ ही आई प्राय: बड़ों द्वारा छोटों को कहानियाँ सुनाने का सिलसिला। प्रकारान्तर में वही कहानियाँ चमत्कारों, अप्सराओं और अदृश्य शक्तियों से होती हुईं धरातल पर उतरीं जिनमें समाज का प्रतिबिम्ब देखा जा सकता है और प्रेरित होकर समाज को उचित दिशा भी दिया जा सकता है। लेखिका सुश्री मालती मिश्रा 'अन्तर्ध्वनि'...
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