image_print

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 31 ☆ व्यंग्य संग्रह – डांस इण्डिया डांस – श्री  जय प्रकाश पाण्डेय ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  श्री  जय प्रकाश पाण्डेय जी  के  व्यंग्य -संग्रह  “ डांस इंडिया डांस” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) पुस्तक चर्चा के सम्बन्ध में श्री विवेक रंजन जी की विशेष टिपण्णी :- पठनीयता के अभाव के इस समय मे किताबें बहुत कम संख्या में छप रही हैं, जो छपती भी हैं वो महज विज़िटिंग कार्ड सी बंटती हैं । ...
Read More

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 30 ☆ काव्य संग्रह – मेरे हमराह – आर डी आनंद ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  श्री आर डी आनंद जी  के  काव्य  संग्रह  “ मेरे हमराह” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) पुस्तक चर्चा के सम्बन्ध में श्री विवेक रंजन जी की विशेष टिपण्णी :-  पठनीयता के अभाव के इस समय मे किताबें बहुत कम संख्या में छप रही हैं, जो छपती भी हैं वो महज विज़िटिंग कार्ड सी बंटती हैं । ...
Read More

हिंदी साहित्य – पुस्तक समीक्षा/आत्मकथ्य ☆ नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की (नर्मदा घाटी का इतिहास) ☆ श्री सुरेश पटवा

सुरेश पटवा            (श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी तीन पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी एवं पंचमढ़ी की कहानी को सारे विश्व में  पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  प्रस्तुत है नवीन पुस्तक “नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) पर आत्मकथ्य श्री सुरेश पटवा जी के शब्दों में । ) ☆ पुस्तक समीक्षा / आत्मकथ्य  – नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)☆  विंध्य-सतपुड़ा मेखला की गगनचुंबी पर्वत श्रंखलाओं से घिरी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तरी-महाराष्ट्र और दक्षिणी-गुजरात में जीवन दायिनी नर्मदा-घाटी मध्यभारत ही नहीं पूरे भारत के लिए प्रकृति के ऐसे वरदान स्वरुप मौजूद है कि करोड़ों मनुष्य व जीव-जन्तु के जीवन आदिकाल से आधुनिक काल तक...
Read More

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 29 ☆ काव्य संग्रह – गीत गुंजन – श्री ओम अग्रवाल बबुआ ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  कवि ओम अग्रवाल बबुआ जी  के  काव्य  संग्रह  “गीत गुंजन” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 29 ☆  ☆ पुस्तक चर्चा –काव्य   संग्रह   – गीत गुंजन ☆ पुस्तक –  ( काव्य - संग्रह ) गीत गुंजन लेखक – कवि ओम अग्रवाल बबुआ प्रकाशक –प्रभा श्री पब्लिकेशन , वाराणसी  मूल्य – २५० रु,...
Read More

हिन्दी साहित्य ☆ पुस्तक विमर्श #10 – स्त्रियां घर लौटती हैं’ …#अर्चित ओझा की दृष्टि में ☆ श्री विवेक चतुर्वेदी

पुस्तक विमर्श – स्त्रियां घर लौटती हैं  श्री विवेक चतुर्वेदी  ( हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के युवा कवि श्री विवेक चतुर्वेदी जी का कालजयी काव्य संग्रह  “स्त्रियां घर लौटती हैं ” का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।  यह काव्य संग्रह लोकार्पित होते ही चर्चित हो गया और वरिष्ठ साहित्यकारों के आशीर्वचन से लेकर पाठकों के स्नेह का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। काव्य जगत श्री विवेक जी में अनंत संभावनाओं को पल्लवित होते देख रहा है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से यह श्री विवेक जी को प्राप्त स्नेह /प्रतिसाद को श्रृंखलाबद्ध कर अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास है।  इस श्रृंखला की दसवीं कड़ी के रूप में प्रस्तुत हैं श्री अर्चित ओझा जी  (अंग्रेजी भाषा में ख्यात बुक रिव्युअर)  की अंग्रेजी भाषा में  समीक्षा का श्री संजय उपाध्याय जी द्वारा  हिंदी अनुवाद  “स्त्रियां घर लौटती हैं' ...#अर्चित ओझा की दृष्टि में” ।) आप श्री अर्चित ओझा जी की ई- अभिव्यक्ति में प्रकाशित अंग्रेजी समीक्षा निम्न लिंक पर पढ़ सकते हैं। ☆ पुस्तक विमर्श #9 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “There exists...
Read More

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 28 ☆ व्यंग्य संग्रह – निज महिमा के ढ़ोल मंजीरे – श्री अजीत श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  श्री श्रवण कुमार उर्मलिया के  व्यंग्य  संग्रह  “निज महिमा के ढ़ोल मंजीरे” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 28☆  ☆ पुस्तक चर्चा – व्यंग्य संग्रह  –  निज महिमा के ढ़ोल मंजीरे ☆ पुस्तक –  (व्यंग्य  संग्रह )निज महिमा के ढ़ोल मंजीरे लेखक – श्री श्रवण कुमार उर्मलिया प्रकाशक –भारतीश्री प्रकाशन , दिल्ली ३२ मूल्य...
Read More

हिन्दी साहित्य ☆ पुस्तक विमर्श #9 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “स्त्रियों  को लेकर बहुत  ही श्रेष्ठ रचाव इन कविताओं में है” – श्री नरेंद्र पुण्डरीक ☆ श्री विवेक चतुर्वेदी

पुस्तक विमर्श – स्त्रियां घर लौटती हैं  श्री विवेक चतुर्वेदी  ( हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के युवा कवि श्री विवेक चतुर्वेदी जी का कालजयी काव्य संग्रह  “स्त्रियां घर लौटती हैं ” का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।  यह काव्य संग्रह लोकार्पित होते ही चर्चित हो गया और वरिष्ठ साहित्यकारों के आशीर्वचन से लेकर पाठकों के स्नेह का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। काव्य जगत श्री विवेक जी में अनंत संभावनाओं को पल्लवित होते देख रहा है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से यह श्री विवेक जी को प्राप्त स्नेह /प्रतिसाद को श्रृंखलाबद्ध कर अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास है।  इस श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में प्रस्तुत हैं श्री  नरेंद्र पुण्डरीक के विचार “स्त्रियों  को लेकर बहुत  ही श्रेष्ठ रचाव इन कविताओं में है ” ।) अमेज़न लिंक >>>   स्त्रियां घर लौटती हैं ☆ पुस्तक विमर्श #9 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “स्त्रियों  को लेकर बहुत  ही श्रेष्ठ रचाव इन कविताओं में है ” – श्री नरेन्द्र पुण्डरीक ☆   स्त्रियां घर लौटती हैं' के लिए वरिष्ठ कवि एवं सम्पादक 'माटी' आदरणीय श्री नरेन्द्र पुण्डरीक जी...
Read More

हिन्दी साहित्य ☆ पुस्तक विमर्श #7 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “एक अनोखा काव्य संग्रह हिन्दी जगत में आया है” – श्री आलोक मिश्रा ☆ श्री विवेक चतुर्वेदी

पुस्तक विमर्श – स्त्रियां घर लौटती हैं  श्री विवेक चतुर्वेदी  ( हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के युवा कवि श्री विवेक चतुर्वेदी जी का कालजयी काव्य संग्रह  “स्त्रियां घर लौटती हैं ” का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।  यह काव्य संग्रह लोकार्पित होते ही चर्चित हो गया और वरिष्ठ साहित्यकारों के आशीर्वचन से लेकर पाठकों के स्नेह का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। काव्य जगत श्री विवेक जी में अनंत संभावनाओं को पल्लवित होते देख रहा है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से यह श्री विवेक जी को प्राप्त स्नेह /प्रतिसाद को श्रृंखलाबद्ध कर अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास है।  इस श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में प्रस्तुत हैं श्री आलोक कुमार मिश्र के विचार “एक अनोखा काव्य संग्रह हिन्दी जगत में आया है ” ।) अमेज़न लिंक >>>   स्त्रियां घर लौटती हैं ☆ पुस्तक विमर्श #7 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “एक अनोखा काव्य संग्रह हिन्दी जगत में आया है ” – श्री आलोक कुमार मिश्र  ☆ 'आंगन में बंधी डोरी पर सूख रहे हैं कपड़े पुरुष की कमीज़ और पतलून फैलाई गई है पूरी चौड़ाई...
Read More

हिन्दी साहित्य ☆ पुस्तक विमर्श #7 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “विवेक अभिव्यक्ति के लिए नितान्त भिन्न तरह से करना चाहते हैं” – श्री लीलाधर जगूडी ☆ श्री विवेक चतुर्वेदी

पुस्तक विमर्श – स्त्रियां घर लौटती हैं  श्री विवेक चतुर्वेदी  ( हाल ही में संस्कारधानी जबलपुर के युवा कवि श्री विवेक चतुर्वेदी जी का कालजयी काव्य संग्रह  “स्त्रियां घर लौटती हैं ” का लोकार्पण विश्व पुस्तक मेला, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।  यह काव्य संग्रह लोकार्पित होते ही चर्चित हो गया और वरिष्ठ साहित्यकारों के आशीर्वचन से लेकर पाठकों के स्नेह का सिलसिला प्रारम्भ हो गया। काव्य जगत श्री विवेक जी में अनंत संभावनाओं को पल्लवित होते देख रहा है। ई-अभिव्यक्ति  की ओर से यह श्री विवेक जी को प्राप्त स्नेह /प्रतिसाद को श्रृंखलाबद्ध कर अपने पाठकों से साझा करने का प्रयास है।  इस श्रृंखला की चौथी कड़ी के रूप में प्रस्तुत हैं  श्री गणेश गनीके विचार “विवेक अभिव्यक्ति के लिए नितान्त भिन्न तरह से करना चाहते हैं ” ।) अमेज़न लिंक >>>   स्त्रियां घर लौटती हैं ☆ पुस्तक विमर्श #7 – स्त्रियां घर लौटती हैं – “विवेक अभिव्यक्ति के लिए नितान्त भिन्न तरह से करना चाहते हैं ” – श्री लीलाधर जगूडी ☆   कविता संग्रह 'स्त्रियां घर लौटती हैं' पर हिन्दी के वरिष्ठ कवि व्यास सम्मान से सम्मानित  श्री लीलाधर...
Read More

हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 27 ☆ व्यंग्य संग्रह – मुर्गे की आत्मकथा – श्री अजीत श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  श्री अजीत श्रीवास्तव जी  के  व्यंग्य  संग्रह  “ मुर्गे की आत्मकथा  ” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 27☆  ☆ पुस्तक चर्चा – व्यंग्य संग्रह  –  मुर्गे की आत्मकथा  ☆ पुस्तक – मुर्गे की आत्मकथा (व्यंग्य  संग्रह) लेखक – श्री अजीत श्रीवास्तव प्रकाशक –अयन प्रकाशन , नई दिल्ली मूल्य २५० रु...
Read More
image_print