image_print

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 124 ☆ ~  कृति चर्चा ~ मधुर निनाद : गीत संग्रह ~गोपालकृष्ण चौरसिया “मधुर” ☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आचार्य जी द्वारा  गोपालकृष्ण चौरसिया "मधुर" के गीत संग्रह “~ मधुर निनाद ~” पर चर्चा।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 124 ☆  ☆ कृति चर्चा ~ मधुर निनाद : गीत संग्रह ~गोपालकृष्ण चौरसिया "मधुर" ☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆ पुस्तक विवरण - मधुर निनाद, गीत संग्रह गोपालकृष्ण चौरसिया "मधुर" प्रथम संस्करण २०१७ पृष्ठ १३५ मूल्य २००/- साहित्यागार प्रकाशन, जयपुर गीतकार संपर्क चलभाष ८१२७७८९७१०, दूरभाष ०७६१ २६५५५९९) (आकार डिमाई, आवरण बहुरंगी सजिल्द जैकेट सहित) समीक्षक - आचार्य संजीव वर्मा "सलिल" छंद हीन कविता और तथाकथित...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 124 ☆ ~  कृति चर्चा ~ मैं प्रेम हूँ : उपन्यास ~ डा. रश्मि कौशल ☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आचार्य जी द्वारा  डा. रश्मि कौशल जी के उपन्यास  “~ मैं प्रेम हूँ ~” पर चर्चा।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 124 ☆  ☆ कृति चर्चा ~ मैं प्रेम हूँ : उपन्यास ~ डा. रश्मि कौशल ☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆ ‘मैं प्रेम हूँ’ - उपन्यास डा. रश्मि कौशल पृ.सं. - 184 मूल्य - 275 रुपये प्रकाशक - शिल्पायन बुक्स, शाहदरा, दिल्ली, प्रथम संस्करण 2020 कृतिकार संपर्क - 9711282391 चर्चाकार: आचार्य संजीव. अमेजन लिंक 👉 ‘मैं प्रेम हूँ’ - उपन्यास - डा. रश्मि...
Read More

हिंदी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ “कामदेव खंडकाव्य” – सुश्री ऊषा सक्सेना ☆ चर्चाकार – श्री सुरेश पटवा ☆

श्री सुरेश पटवा ☆ पुस्तक चर्चा  ☆ “कामदेव खंडकाव्य” – सुश्री ऊषा सक्सेना ☆ चर्चाकार – श्री सुरेश पटवा ☆ पुस्तक: कामदेव खंडकाव्य लेखिका: ऊषा सक्सेना प्रकाशक: अस्मि प्रकाशन भोपाल मूल्य: 200/- समीक्षक: सुरेश पटवा भारतीय वांग्मय साहित्य मिथकीय चरित्रों का ख़ज़ाना है। जितनी विविधता भारतीय पौराणिक कथाओं में मिलती है उतनी विश्व की किसी सभ्यता में नहीं है। वेदों में प्रकृति के चरों अर्थात् सूर्य, सविता, इंद्र, रुद्र की अभ्यर्थना है। उपनिषदों में दार्शनिक सिद्धांत बिखरे हैं। सिद्धांतों का क़िस्सों-कहानियों के माध्यम से व्यक्तिकरण पुराणों का विषय रहा है। जीवन की किसी घटना विशेष को लेकर लिखा गया काव्य खण्डकाव्य है। "खण्ड काव्य' शब्द से ही स्पष्ट होता है कि इसमें मानव जीवन की किसी एक ही घटना की प्रधानता रहती है। जिसमें नायक या नायिका का जीवन सम्पूर्ण रूप में कवि को प्रभावित नहीं करता। कवि चरित्र के जीवन की किसी सर्वोत्कृष्ट घटना से प्रभावित होकर जीवन के उस खण्ड विशेष का अपने काव्य में पूर्णतया उद्घाटन करता है। कामदेव के जीवन की एक...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 123 ☆ ~ कृति चर्चा ~ हौसलों के पंख : नवगीत की उड़ान ~ कल्पना रामानी ☆ चर्चाकार – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’   (आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है आचार्य जी द्वारा  कृति चर्चा और कृति है कल्पना रामानी जी का नवगीत संग्रह “~ हौसलों के पंख : नवगीत की उड़ान~”) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # 123 ☆  ☆ कृति चर्चा ~ हौसलों के पंख : नवगीत की उड़ान ~ कल्पना रामानी ☆ चर्चाकार - आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆ कृति चर्चा: हौसलों के पंख : नवगीत की उड़ान चर्चाकार: आचार्य संजीव. [कृति विवरण: हौसलों के पंख, नवगीत संग्रह, कल्पना रामानी, आकार डिमाई, आवरण पेपरबैक, बहुरंगी, पृष्ठ ११२, नवगीत...
Read More

हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ “आवाज की खनक” – श्री मनोज शर्मा ☆ श्री कमलेश भारतीय☆

श्री कमलेश भारतीय  (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता) ☆ पुस्तक चर्चा ☆ “आवाज की खनक” – श्री मनोज शर्मा ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆ मनोज शर्मा और उनकी कविता "मैंने एक कविता लिखी है" -कमलेश भारतीय मनोज शर्मा जो मेरे छोटे भाई की तरह है । जिन दिनों नवांशहर में था उन दिनों मनोज अपनी हिंदी प्राध्यापिका अहिंसा पाठक के साथ नवांशहर आता । हमारी अनौपचारिक कवि गोष्ठियां उनके घर होतीं । खूब...
Read More

हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ “काव्य रंग निशा के संग (काव्य-संग्रह)” – डॉ निशा अग्रवाल ☆

☆ पुस्तक चर्चा ☆ “काव्य रंग निशा के संग (काव्य-संग्रह)” – डॉ निशा अग्रवाल ☆ काव्य रंग निशा के संग (काव्य-संग्रह) लेखिका : डॉ निशा अग्रवाल प्रकाशक : SGSH Publication पृष्ठ - 81  मूल्य - रु 149/- अमेज़न लिंक  >> काव्य रंग निशा के संग   "अगर रख सको तो एक निशानी हूँ मैं, खो दो तो एक कहानी हूँ मैं" - सुश्री मंजु शर्मा, कैलीफोर्निया आवरण ही मनमोहक-कमलपुष्प विविध रंगों की आभा बिखेरता हुआ, निशा जी की कर्म के प्रति निर्लिप्तता,निष्कामता प्रतिपादित करता हुआ। उनकी कविताओं में गहन भावों की निर्झरिणी प्रवाहित होती है जिसमें अवगाहन कर रसानुभूति प्राप्त होती है। डॉ निशा, नारी सशक्तिकरण का सटीक उदाहरण हैं, इस दिशा में किए गए उनके प्रयत्न प्रशंसनीय हैं। कविताओं में भी नारी की व्यथा उभारती हैं। स्वयं शिक्षिका होते हुए गौरवान्वित अनुभव करते हुए ”निःस्वार्थ भाव से शिक्षा देकर, राहों की रहबर बन जाऊँ” क्या ख़ूब अभिलाषा प्रकट की है। हौसले इतने बुलंद कि मस्त गगन में उड़, चाँद को छूना चाहती हैं। ”अगर रख सको...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 127 – “अर्घ, कविता संग्रह” – सुश्री दामिनी खरे ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’☆

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जो  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक के माध्यम से हमें अविराम पुस्तक चर्चा प्रकाशनार्थ साझा कर रहे हैं । श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका दैनंदिन जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है सुश्री दामिनी खरे जी द्वारा लिखित काव्य संग्रह “अर्घ…” पर चर्चा। ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 127 ☆ ☆ “अर्घ, कविता संग्रह” – सुश्री दामिनी खरे ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’ ☆ पुस्तक चर्चा अर्घ, कविता संग्रह दामिनी खरे आवरण.. यामिनी खरे प्रकाशक … कृषक जगत, भोपाल काव्य रचनाओ  को गहराई से समझने के लिये वांछित होता है कि रचनाकार के व्यक्तित्व, उसके परिवेश, व कृतित्व का किंचित...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 126 – “स्मृति के झरोखे से…” (यात्रा वृतांत) – सुश्री मनोरमा दीक्षित ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’☆

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जो  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक के माध्यम से हमें अविराम पुस्तक चर्चा प्रकाशनार्थ साझा कर रहे हैं । श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका दैनंदिन जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है सुश्री मनोरमा दीक्षित जी द्वारा लिखित यात्रा वृत्तांत  “स्मृति के झरोखे से...” पर चर्चा। ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 126 ☆ ☆ “स्मृति के झरोखे से...” (यात्रा वृतांत) – सुश्री मनोरमा दीक्षित ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’ ☆ पर्यटन व यात्राओ को साहित्य की जननी कहा जाता है. पर्यटन के दौरान साहित्यकार का मन प्रकृति का सानिध्य पाकर स्वाभाविक रूप से उर्वर...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 125 – “पारा पारा” (उपन्यास) – सुश्री प्रत्यक्षा ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’☆

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जो  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक के माध्यम से हमें अविराम पुस्तक चर्चा प्रकाशनार्थ साझा कर रहे हैं । श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका दैनंदिन जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है श्री कुमार सुरेश जी द्वारा लिखी कृति  “व्यंग्य राग” पर चर्चा। ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 125 ☆ ☆ “पारा पारा” (उपन्यास) – सुश्री प्रत्यक्षा ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’ ☆ पारा पारा (उपन्यास ) लेखिका.. प्रत्यक्षा राजकमल पेपरबैक्स संस्करण २०२२ मूल्य २५०रु पृष्ठ २३० चर्चाकार… विवेक रंजन श्रीवास्तव, भोपाल उपन्यास यहाँ से प्राप्त करें 👉 https://amzn.to/3R4eQmP  या व्हाट्सएप करें 👉 9311397733 "मैं इन्हीं औरतों की कड़ी हूँ। मुझमें मोहब्बत और भय समुचित...
Read More

हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 124 – ““बिना मतलब” का मतलब” – श्री राजा सिंह ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’☆

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जो  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक के माध्यम से हमें अविराम पुस्तक चर्चा प्रकाशनार्थ साझा कर रहे हैं । श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका दैनंदिन जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है श्री राजा सिंह जी द्वारा लिखी कृति ““बिना मतलब” का मतलब” पर चर्चा। ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 124 ☆ ☆ ““बिना मतलब” का मतलब” – श्री राजा सिंह ☆ चर्चाकार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’’ ☆ आदमी को पढ़ कर कहानी गढ़ने वाले राजा सिंह के कहानी संग्रह “बिना मतलब” का मतलब रचना के बिम्ब, लेखक, प्रकाशक, किताब, समीक्षक और पाठक का अटूट साहित्यिक संबंध होता...
Read More
image_print