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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ आत्मकथ्य – बचपन रसगुल्लों का दोना (बालगीत संग्रह) ☆ श्री सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’

☆ पुस्तक चर्चा ☆ आत्मकथ्य – बचपन रसगुल्लों का दोना (बालगीत संग्रह) ☆ श्री सुरेश कुशवाहा 'तन्मय' ☆ पुस्तक - बचपन रसगुल्लों का दोना (बालगीत संग्रह)    कवि - श्री सुरेश कुशवाहा 'तन्मय'  प्रकाशक -  AISECT Publications (1 January 2021) पृष्ठसंख्या -   187 मूल्य - रु 250/- अमेजन का लिंक >>>> "बचपन रसगुल्लों का दोना" श्री सुरेश कुशवाहा ‘तन्मय’ सातवीं साहित्यिक कृति के रूप में मेरे सद्य प्रकाशित बाल गीत संग्रह " बचपन रसगुल्लों का दोना" पर व्यक्त आत्मकथ्य - “सुरेश कुशवाहा तन्मय” जब मन होता है कि, कोई कविता नई लिखूँ तब मैं बच्चों से, खुलकर बातें कर लेता हूँ, लौट लौट अपने बचपन की, यादें लेकर के नए समय की नाव, बालपन की मैं खेता हूँ। पहले हम बच्चे ही थे, फिर समय के साथ बड़े हुए, गृहस्थी बसी, घर में दो बेटियाँ और एक बेटे का आगमन हुआ। बच्चों के बढ़ते कद के साथ ही ज्यों ज्यों हमारी उम्र ढलती गई, हम वापस बच्चे होते गए। अब 73 वर्ष की यह आयु तो एक तरह से वापसी की ही अवस्था...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ “क्रौंच” – श्री संजय भारद्वाज ☆ प्रोफेसर नंदलाल पाठक

प्रोफेसर नंदलाल पाठक (क्षितिज प्रकाशन एवं इंफोटेन्मेन्ट द्वारा आयोजित श्री संजय भारद्वाज जी के कवितासंग्रह 'क्रौंच' का ऑनलाइन लोकार्पण कल रविवार 31 अक्टूबर 2021, रात्रि 8:30 बजे होगा।  प्रोफेसर नन्दलाल पाठक जी ने क्रौंच पुस्तक की भूमिका लिखी है, जिसे हम अपने प्रबुद्ध पाठकों से साझा कर रहे हैं।) 📚 क्रौंच कविताएँ अब पाठकों की संपत्ति बन गई हैं, कवि की यही सफलता है✍️ प्रोफेसर नंदलाल पाठक 📚   मेरे लिए काव्यानंद का अवसर है क्योंकि मेरे सामने संजय भारद्वाज की क्रौंच कविताएँ हैं। संजय जी की 'संजय दृष्टि' यहाँ भी दर्शनीय है। कविता के जन्म से जुड़ा क्रौंच शब्द कितना आकर्षक और महत्वपूर्ण है। प्राचीनता और नवीनता का संगम भारतीय चिंतन में मिलता रहता है। क्रौंच की कथा करुण रस से जुड़ी है। संजय जी लिखते हैं, यह संग्रह समर्पित है उन पीड़ाओं को जिन्होंने डसना नहीं छोड़ा, मैंने रचना नहीं छोड़ा। यह हुई मानव मन की बात। 'उलटबाँसी' कविता की अंतिम पंक्तियाँ हैं- लिखने की प्रक्रिया में पैदा होते गए/ लेखक के आलोचक और प्रशंसक। बड़ी सहजता से संजय जी ने यह...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 101 – “जीवन वीणा” – सुश्री अनीता श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका पारिवारिक जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है  सुश्री अनीता श्रीवास्तव जी के काव्य संग्रह  “जीवन वीणा” – की समीक्षा।  पुस्तक चर्चा पुस्तक : जीवन वीणा ( काव्य संग्रह) कवियत्री : सुश्री अनीता श्रीवास्तव प्रकाशक : अंजुमन प्रकाशन, प्रयागराज मूल्य : १५० रु पृष्ठ : १५० आई एस बी एन ९७८.९३.८८५५६.१२.५ ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 101 – “जीवन वीणा” – सुश्री अनीता श्रीवास्तव ☆    जीवन सचमुच वीणा ही तो है. यह हम पर है कि हम उसे किस तरह जियें. वीणा के तार समुचित कसे हुये हों,...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 100 – “सकारात्मक सपने” – सुश्री अनुभा श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका पारिवारिक जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है  सुश्री अनुभा श्रीवास्तव जी की पुस्तक  “सकारात्मक सपने” – की समीक्षा। ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 100 – “सकारात्मक सपने” – सुश्री अनुभा श्रीवास्तव ☆   पुस्तक चर्चा Amazon Link for eBook :  सकारात्मक सपने   Kobo Link for eBook        : सकारात्मक सपने   कृति ...सकारात्मक सपने लेखिका ...अनुभा श्रीवास्तव प्रकाशक ... डायमण्ड पाकेट बुक्स दिल्ली मूल्य ...११० रु पृष्ठ .. १२४ साहित्य अकादमी म प्र. संस्कृति परिषद के सहयोग से प्रकाशित एवं लेखिका को इस कृति पर  म. प्र लेखिका संघ का वर्ष...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 99 – “हम इश्क के बंदे हैं” – स्व रामानुजलाल श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका पारिवारिक जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है  स्व रामनुजलाल श्रीवास्तव जी के कथा संग्रह “हम इश्क के बन्दे हैं” – की समीक्षा।  पुस्तक चर्चा पुस्तक : हम इश्क के बंदे हैं (कहानी संग्रह) लेखक : स्व रामानुजलाल श्रीवास्तव प्रकाशक : त्रिवेणी परिषद, यादव कालोनी जबलपुर मूल्य : २०० रु , पृष्ठ : १५० ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 99 – "हम इश्क के बंदे हैं" - स्व रामानुजलाल श्रीवास्तव ☆  स्व रामानुजलाल श्रीवास्तव 'ऊंट' जी ने हिन्दी गीत , कवितायें , उर्दू  गजलें...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆बूझोवल – रचनाकार – महादेव प्रेमी ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” (सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का  हिन्दी बाल -साहित्य  एवं  हिन्दी साहित्य  की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। आज प्रस्तुत है  आपके द्वारा पुस्तक की समीक्षा  “बूझोवल”। ☆ पुस्तक समीक्षा ☆ बूझोवल – रचनाकार - महादेव प्रेमी ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆    पुस्तक-  बूझोवल रचनाकार-  महादेव प्रेमी प्रकाशक- किताबगंज प्रकाशन, रेमंड शोरूम, राधा कृष्ण मार्केट, एसबीआई के पास, गंगापुर सिटी- 322201 जिला -सवाई माधोपुर (राजस्थान) पृष्ठ संख्या- 116 मूल्य- ₹195 पहेलियों का इतिहास काफी पुराना है. जब से मानव ने इशारों में बातें करना सीखा है तब से यह अभिव्यक्त होते आ रहे हैं. आज भी ये इशारें विभिन्न रूपों में प्रचलित है. जब घर पर कोई मेहमान आता है तब मां अपने बच्चों को इशारा कर के चुप करा देती है. बच्चे मां का इशारा तुरंत समझ जाते हैं.  अधिकांश बाल पत्रिकांए इन्हीं इशारों पर आधारित बाल पहेलियां प्रकाशित करती है. इन में वर्ग पहेली, प्रश्न पहेली, चित्र पहेली और गणित पहेलियां मुख्य होती है. कई किस्सेकहानियों में भी पहेलियां प्रयुक्त होती आई है....
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ “प्रकृति की पुकार”- संपादक- डॉक्टर सूरज सिंह नेगी, डॉक्टर मीना सिरोला ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’

श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” (सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का  हिन्दी बाल -साहित्य  एवं  हिन्दी साहित्य  की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। आज प्रस्तुत है  आपके द्वारा पुस्तक की समीक्षा  “प्रकृति की पुकार”। आप साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य”  के अंतर्गत उनकी मानवीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण लघुकथाएं प्रत्येक गुरुवार को पढ़ सकते हैं।  ) ☆ पुस्तक समीक्षा ☆ प्रकृति की पुकार - संपादक- डॉक्टर सूरज सिंह नेगी, डॉक्टर मीना सिरोला ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆  पुस्तक- प्रकृति की पुकार  संपादक- डॉक्टर सूरज सिंह नेगी, डॉक्टर मीना सिरोला प्रकाशक- साहित्यागार, धमाणी मार्केट की गली, चौड़ा रास्ता, जयपुर (राज) पृष्ठ संख्या- 340 मूल्य- ₹500   सभी सुनें प्रकृति की पुकार प्रकृति अमूल्य है। हमें बहुत कुछ देती है। जिसका कोई मोल नहीं लेती है। यह बात अस्पताल में कई मरीज बीमारी के दौरान जान पाए हैं। 10 दिन के इलाज में ऑक्सीजन के ₹50000 तक खर्च करने पड़े हैं। यही ऑक्सीजन प्रकृति हमें मुफ्त में देती है। जिसका कोई मोल नहीं लेती है। यह हमारे लिए सबसे अनमोल...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 98 – साक्षात्कार (बाल साहित्य विशेषांक) ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका  पारिवारिक जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं। आज प्रस्तुत है  म प्र साहित्य अकादमी के मासिक प्रकाशन  “साक्षात्कार (बाल साहित्य विशेषांक)” – की समीक्षा।  पुस्तक चर्चा साक्षात्कार (बाल साहित्य विशेषांक) अंक ४८५..४८६ संयुक्तांक नवम्बर दिसम्बर म प्र साहित्य अकादमी का मासिक प्रकाशन ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# 98 – साक्षात्कार (बाल साहित्य विशेषांक) ☆  साक्षात्कार का संभवतः पहला प्रयास है , अंक ४८५..४८६ संयुक्तांक नवम्बर दिसम्बर २०२० जो बाल साहित्य पर केंद्रित है, तथा इतनी महत्वपूर्ण शोध सामग्री बाल साहित्य की उपयोगिता, लेखन, बच्चों...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ आत्मकथ्य – ‘रुद्र्देहा’ ☆ श्रीमती प्रतिमा अखिलेश एवं श्री अखिलेश सिंह श्रीवास्तव ‘दादूभाई’

☆ पुस्तक चर्चा ☆ आत्मकथ्य – ‘रुद्र्देहा’ ☆ श्रीमती प्रतिमा अखिलेश एवं श्री अखिलेश सिंह श्रीवास्तव 'दादूभाई' ☆ पुस्तक – रुद्र्देहा लेखक द्वय – श्रीमती प्रतिमा अखिलेश एवं श्री अखिलेश सिंह श्रीवास्तव 'दादूभाई'   प्रकाशक – उत्कर्ष प्रकाशन, मेरठ (उत्तर प्रदेश)  मूल्य – 250 रु   पृष्ठ संख्या –  296 अमेज़न लिंक ==>>  रुद्रदेहा   यह उपन्यास और मन की बात... श्रीमती प्रतिमा अखिलेश एवं श्री अखिलेश सिंह श्रीवास्तव 'दादूभाई'  [मध्य प्रदेश के सिवनी निवासी विद्वान लेखक श्री अखिलेश श्रीवास्तव उर्फ दादूभाई एवं पैनी लेखनी की धनी विख्यात कवयित्री व लेखिका श्रीमती प्रतिमा अखिलेश जी द्वारा लिखित युगनायिका नर्मदा की अद्भुत गाथा को इस पुस्तक में बड़े ही रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया गया है जिसके लिए दोनों प्रबुद्ध कलमकारों को साधुवाद...भावुक असरदार भाषा-शैली पुस्तक ‘रुद्रदेहा’ को प्रभावकारी बनाते हैं जो लेखकों को विद्वता की श्रेणी में ला खड़ा करते हैं। मां नर्मदा के विविध सन्दर्भों का गहन अध्ययन मंथन कर इस पुस्तक को लेखनी दी गयी है जिसका भास पाठकों को स्वतः ही हो जायेगा कि पाठक एक बार...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ कृष्ण काव्य पीयूष — शब्द अमृत ☆ सुश्री नीलम भटनागर 

सुश्री नीलम भटनागर   ☆ पुस्तक चर्चा ☆ कृष्ण काव्य पीयूष --- शब्द अमृत ☆ सुश्री नीलम भटनागर ☆  कृष्ण काव्य पीयूष --- शब्द अमृत  कृष्ण अमृत में पगी श्याम रंग में रंगी बड़ी देर सो ही रही अब पुनः पढ़कर जगी कुछ समय से ऐसा लगने लगा था कि अब तो भक्ति बस ऊपरी दिखावे की बात हो गई है मंदिरों में टीवी पर या कुछ त्योहारों पर । लेकिन चि विवेक रंजन ने कृष्ण काव्य पीयूष भेजी व समीक्षा करने का आग्रह किया । पढ़ा तो लगा कि  ऐसे ही नहीं कहा गया है कि हमारा धर्म सनातन है ।   मन जब सोचेगा की इति हुई तभी पुनः आरंभ होता दिखेगा।  एक नजर में ही लगा  सच में यह रस की  गागर है या यह भक्ति का सागर है  कैसे कुछ लिखूं इस पर यह खुद ही तो नट नागर है  न जाने  क्यों अवचेतन में यह सोच बन गई थी  कि विदेशों में तो प्रवासी भारतीय केवल मौज मजे में डूबे रहते हैं , नित नई...
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