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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ आलेख संग्रह – “चिन्तन के आयाम” – डॉ मुक्ता ☆ श्री पवन शर्मा परमार्थी

☆ आलेख संग्रह – चिन्तन के आयाम  – डॉ मुक्ता ☆  समीक्षक - श्री पवन शर्मा परमार्थी ☆ चिन्तन के आयाम'...एक श्रेष्ठत्तम कृति - श्री पवन शर्मा परमार्थी आदरणीया डॉ. मुक्ता जी की नवीन श्रेष्ठत्तम कृति 'चिन्तन के आयाम' आलेख-संग्रह के विषय में मुझे कुछ शब्द लिखने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, अपितु कृति की रचनाकार के सम्मुख मेरी लेखनी बहुत ही बौनी है। फिर भी उनके लिए माँ शारदे की कृपा से कुछ लिखने का साहस जुटा पा रहा हूँ। वैसे तो लेखिका डॉ. मुक्ता ने पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर स्वयं का विस्तृत रूप से विवरण प्रस्तुत किया है, उनके बारे में मेरा लिखना इतना आवश्यक नहीं। फिर भी उनके विषय में संक्षिप्त रूप में कुछ लिखना मेरा भी दायित्व बनता है। डॉ. मुक्ता एक महान्, यशस्वी, सुविख्यात कवयित्री व साहित्यिकार के रूप में साहित्य जगत् में प्रतिष्ठित हैं, जो समस्त हिन्दी साहित्य जगत् का गर्व व गौरव हैं तथा उन्हें विशिष्ट हिन्दी सेवाओं के निमित्त भारत के पूर्व राष्ट्रपति स्व....
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ कथा संग्रह – यह आम रास्ता नहीं है – श्री कमलेश भारतीय ☆ सुश्री कृष्णलता यादव

श्री कमलेश भारतीय  (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता) गुरुग्राम में डाॅ प्रेम जनमेजय के आवास पर एक माह पूर्व मेरे कथा संग्रह के विमोचन पर हरियाणा की सशक्त लेखिका सुश्री कृष्णलता यादव भी मेरे आग्रह पर आईं थीं । उन्हें वहीं नया कथा संग्रह भेंट किया था । उन्होंने इस पर विस्तारपूर्वक अपनी प्रतिक्रिया इस प्रकार दी है ::: सुश्री कृष्णलता यादव  ☆ कथा संग्रह – यह आम रास्ता नहीं है  – लेखक...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक की पुस्तक चर्चा # 45 ☆ व्यंग्य संग्रह – ७५ वाली भिंडी – सुश्री नूपुर अशोक ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  सुश्री नूपुर अशोक जी  के  व्यंग्य  संग्रह   “७५ वाली भिंडी” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 45 ☆  व्यंग्य संग्रह – ७५ वाली भिंडी व्यंग्यकार – सुश्री नूपुर अशोक  प्रकाशक – रचित प्रकाशन, कोलकाता   पृष्ठ १२० ☆ पुस्तक चर्चा – व्यंग्य  संग्रह  – ७५ वाली भिंडी – व्यंग्यकार –सुश्री नूपुर अशोक ☆...
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हिन्दी साहित्य ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 44 ☆ व्यंग्य संग्रह – अपनी ढपली अपना राग – श्री मुकेश राठौर ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  श्री मुकेश राठौर  जी  के  व्यंग्य  संग्रह   “अपनी ढ़पली अपना राग” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 44 ☆  व्यंग्य संग्रह – अपनी ढ़पली अपना राग  व्यंग्यकार – श्री मुकेश राठौर  प्रकाशक – बोधि प्रकाशन, जयपुर  पृष्ठ १०० मूल्य १२० रु ☆ पुस्तक चर्चा – व्यंग्य  संग्रह  – अपनी ढ़पली अपना राग – व्यंग्यकार –...
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हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 43 ☆ व्यंग्य संग्रह – पांडेय जी सर्वव्यापी – डॉ लालित्य ललित ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  डॉ लालित्य ललित जी  के  व्यंग्य  संग्रह   “पांडेय जी सर्वव्यापी” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 43 ☆  व्यंग्य संग्रह - पांडेय जी सर्वव्यापी व्यंग्यकार - डॉ  लालित्य ललित प्रकाशक - इंडिया नेट बुक्स पृष्ठ १२० ☆ पुस्तक चर्चा – व्यंग्य  संग्रह  – पांडेय जी सर्वव्यापी – व्यंग्यकार – डॉ  लालित्य ललित ☆ पुस्तक...
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हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 42 ☆ व्यंग्य संग्रह – वे रचना कुमारी को नहीं जानते – श्री शांतिलाल जैन ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़  सकते हैं । आज प्रस्तुत है  श्री शंतिलाल जैन जी  के  व्यंग्य  संग्रह   “वे रचना कुमारी को नहीं जानते” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा। संयोग से  इस व्यंग्य संग्रह को मुझे भी पढ़ने का अवसर मिला। श्री शांतिलाल जी के साथ कार्य करने का अवसर भी ईश्वर ने दिया। वे उतने ही सहज सरल हैं, जितना उनका साहित्य। श्री...
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हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 41 ☆ पत्रिका साहित्य समीर दस्तक – संपादक – कीर्ति श्रीवास्तव ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  कीर्ति श्रीवास्तव  जी के संपादन में प्रकाशित  पत्रिका साहित्य समीर दस्तक पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा – # 41 ☆  ☆ पुस्तक चर्चा – पत्रिका -  साहित्य समीर दस्तक  – संपादक – कीर्ति श्रीवास्तव ☆. चर्चा में पत्रिका – साहित्य समीर दस्तक सितंबर अक्टूबर 2020 अंक संपादक – कीर्ति श्रीवास्तव २४२, सर्व...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक चर्चा ☆ समस्या का पंजीकरण व अन्य व्यंग्य – पुस्तक चर्चा में ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

व्यंग्य की नई पुस्तक चर्चा में  कृति - समस्या का पंजीकरण व अन्य व्यंग्य लेखक -  श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव, जबलपुर श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी को उनकी नई पुस्तक "समस्या का पंजीकरण व अन्य व्यंग्य" के प्रकाशन के ई- अभिव्यक्ति परिवार की ओर से हार्दिक बधाई।  यह नई पुस्तक चर्चा में है, और चर्चाकार हैं व्यंग्य जगत की सुप्रसिद्ध हस्तियां। प्रस्तुत हैं प्रसिद्ध व्यंग्यकारों के बेबाक विचार - ☆ पुस्तक चर्चा ☆ समस्या का पंजीकरण व अन्य व्यंग्य - पुस्तक चर्चा में ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ☆ 1  सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री मुकेश राठौर लिखते हैं इधर जो मैंने पढ़ा  क्रम में आज प्रस्तुत संस्कारधानी जबलपुर के ख्यात व्यंग्यकार श्री विवेक रंजन जी श्रीवास्तव के सद्य:प्रकाशित व्यंग्य संग्रह समस्या का पंजीकरण व अन्य व्यंग्य को आज पढ़ने का अवसर मिला।  जैसा कि भूमिका में ही पद्मश्री व्यंग्यकार आदरणीय डॉ ज्ञान चतुर्वेदी जी ने बताया कि श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव जी पेशे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है। विज्ञान, तकनीकी का छात्र किसी भी विषय पर...
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हिन्दी साहित्य – पुस्तक समीक्षा ☆ स्त्री-पुरुष – श्री सुरेश पटवा ☆ समीक्षक – श्री गोकुल सोनी

पुस्तक - स्त्री-पुरुष लेखक - श्री सुरेश पटवा प्रकाशक - नोशन प्रेस, चेन्नई मूल्य - रु.२६०/- ☆ पुस्तक चर्चा – स्त्री-पुरुष – लेखक श्री सुरेश पटवा – समीक्षक - श्री गोकुल सोनी  ☆ श्री सुरेश पटवा जी द्वारा लिखित पुस्तक 'स्त्री-पुरुष' को पढ़ते हुए वैचारिक धरातल पर जो अनुभव हुए, वैसे प्राय: अन्य कृतियों को पढ़ते समय नहीं होते. रिश्तों के दैहिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक, गूढ़ रहस्यों को धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, संरचनात्मक, परिप्रेक्ष्य में अनावृत्त कर विवेचन करती यह पुस्तक समूचे विश्व के मत-मतान्तरों को समेटते हुए सचमुच एक श्रमसाध्य अन्वेषण है. जहां श्री पटवा जी स्त्री- पुरुष के अंतर्संबंधों की गहराई में उतरते हुए कभी एक मनोवैज्ञानिक नजर आते हैं, तो कहीं इतिहासवेत्ता, कहीं भूगोलवेत्ता, तो कहीं समाजशास्त्री. पुस्तक को पढ़ते हुए लेखक की प्रतिभा के विभिन्न आयाम सामने आते हैं. भारतवर्ष की पुरातन संस्कृति और धर्म तथा आध्यात्म का आधार वेद-पुराण, उपनिषद और अन्य धार्मिक ग्रन्थ हैं. जहाँ हमारे ऋषि-मुनियों ने मनुष्य के लिए चार पुरुषार्थ अभीष्ट बताये हैं, जो धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष हैं. इनमे 'काम'...
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हिन्दी साहित्य – ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा # 40 ☆ व्यंग्य संग्रह – ५ वां कबीर – श्री बुलाकी शर्मा ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (हम प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’जी के आभारी हैं जिन्होने  साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा”शीर्षक से यह स्तम्भ लिखने का आग्रह स्वीकारा। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) में कार्यरत हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है।  उनका कार्यालय, जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास  करते हैं । आप प्रत्येक मंगलवार को श्री विवेक जी के द्वारा लिखी गई पुस्तक समीक्षाएं पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है  श्री बुलाकी शर्मा जी  के  व्यंग्य  संग्रह   “५ वां कबीर  ” पर श्री विवेक जी की पुस्तक चर्चा । ) पुस्तक चर्चा के सम्बन्ध में श्री विवेक रंजन जी की विशेष टिपण्णी :- पठनीयता के अभाव के इस समय मे किताबें बहुत कम संख्या में छप रही हैं, जो छपती भी हैं वो महज विज़िटिंग कार्ड सी बंटती हैं । ...
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