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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -2 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टि  श्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 2 ☆  संजय भारद्वाज अनुराधा- (रमेश को सम्मोहित करती है।) यहाँँ देखो... मेरी आँखों में देखो...मेरी आँखों में देखो......
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -1 ☆  श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टि  श्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । आज से  प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक "एक भिखारिन की मौत"। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत - 1...
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मराठी साहित्य – रंगमंच ☆ नाटकावर बोलू काही: आनंद – स्व विष्णु वामन शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर

श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆ रंगमंच ☆ नाटकावर बोलू काही: आनंद - स्व विष्णु वामन शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर ☆  ‘नटसम्राट’ या नाटकाचे लेखक आणि या नाटकासाठी ज्ञानपीठ पुरस्कार मिळालेले वि. वा. शिरवाडकर यांची ‘वीज म्हणाली धरतीला’, ‘आनंद’, दूसरा पेशवा, ‘कौंतेय’, विदूषक,  अशी आणखीही अनेक उत्तम नाटके आहेत. ही सारी नाटके बघू जाता, त्यांना नाट्यलेखनाचे सम्राटच म्हणायला हवं. ‘आनंद’ हे असंच एक उत्तम नाटक. या नाटकाचा पहिला प्रयोग, नाट्यसंपदा मुंबई या संस्थेद्वारे १८ ऑक्टोबर १९७५ रोजी साहित्य संघ मंदिर मुंबई इथे सायंकाळी ७ वाजता सादर करण्यात आला. पुढे या नाटकाचे किती प्रयोग झाले माहीत नाही. नाटकापेक्षा यावरचा चित्रपट अधीक गाजला पण एखादी कलाकृती किती वाजली-गाजली यावर काही त्या कलाकृतिचे मोल ठरत नाही. ‘आनंद’ नाटकाचे मूळ श्री हृषिकेश मुखर्जी यांच्या ‘आनंद’ चित्रपटातलेच आहे. मरण समोर उभे असताना, एक मनुष्य, हसत-खेळत, प्रत्येक परिचितात स्वत:ला गुंतवून घेत, भोवतालच्या जीवनात सुखाच्या लहरी निर्माण करीत आपला अस्तकाल एका बेहोष धुंधीत व्यतीत करतो, ही कल्पना मला अतिशय हृद्य वाटली.’ असं सुरूवातीला, श्री हृषिकेश मुखर्जी यांचे आभार मानताना...
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मराठी साहित्य – रंगमंच ☆ नाट्यउतारा: आनंद – स्व विष्णु वामन शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर

स्व विष्णु वामन शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’  श्रीमती उज्ज्वला केळकर  ☆ रंगमंच ☆ नाट्यउतारा: आनंद - स्व विष्णु वामन शिरवाडकर ‘कुसुमाग्रज’ ☆ श्रीमती उज्ज्वला केळकर’ ☆  आनंद (आनंद नाटकातील आनंद आणि डॉ. उमेश म्हणजेच आनंदचा बाबूमोशाय, यांच्यातील एक संवाद) आनंद: (रुद्ध स्वरात)  बाबूमोशाय, कितीदा कितीदा मला आठवण करून देशील- की तुझं आयुष्य आता संपलं आहे. - शेवटाची सुरुवात झाली आहे.  बाबूमोशाय, चांदयापासूंच नव्हे, तर माझ्या मरणापासूनही मी दूर आलो होतो. वाटलं होतं, तुम्हा लोकांच्या जीवनाच्या बहरलेल्या ताटव्यातून हिंडताना माझी आयुष्याची लहानशी कणिकाही डोंगरासारखी मोठी होईल. थेंबाला क्षणभर समुद्र झाल्यासारखा वाटेल. पण- नाही- बाबांनो- मरणाला मारता येत नाही. आपल्या मनातून काढलं तर समोरच्या डोळ्यात ते तरंगायला लागतं-तुमच्या प्रत्येकाच्या डोळ्यात मी माझं मरण पाहतो आहे- पण बाबूमोशाय,  तू म्हणतोस, ते खरं आहे. मी क्षमा मागतो तुझी – तुम्हा सर्वांची- इथं येऊन तुमच्या आयुष्यात असा धुडगूस घालण्याचा मला काहीही अधिकार नव्हता. – मी चुकलो- मी- मी – उद्या चांदयाला परत जाईन बाबूमोशाय- उमेश: (उठून त्याचे खांदे धरून ओरडतो ) तू जाऊ शकत नाहीस, आनंद - माझ्या लाडक्या- तू आता कुठंही जाऊ...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच-सिनेमा ☆ दर्शकों को हंसा कर खुशी मिलती है पर सुकून संगीत में  : सुगंधा मिश्रा ☆ श्री कमलेश भारतीय

श्री कमलेश भारतीय (जन्म – 17 जनवरी, 1952 ( होशियारपुर, पंजाब)  शिक्षा-  एम ए हिंदी , बी एड , प्रभाकर (स्वर्ण पदक)। प्रकाशन – अब तक ग्यारह पुस्तकें प्रकाशित । कथा संग्रह – 6 और लघुकथा संग्रह- 4 । यादों की धरोहर हिंदी के विशिष्ट रचनाकारों के इंटरव्यूज का संकलन। कथा संग्रह -एक संवाददाता की डायरी को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से मिला पुरस्कार । हरियाणा साहित्य अकादमी से श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार। पंजाब भाषा विभाग से  कथा संग्रह-महक से ऊपर को वर्ष की सर्वोत्तम कथा कृति का पुरस्कार । हरियाणा ग्रंथ अकादमी के तीन वर्ष तक उपाध्यक्ष । दैनिक ट्रिब्यून से प्रिंसिपल रिपोर्टर के रूप में सेवानिवृत। सम्प्रति- स्वतंत्र लेखन व पत्रकारिता  ☆ रंगमंच-सिनेमा ☆ दर्शकों को हंसा कर खुशी मिलती है पर सुकून संगीत में  : सुगंधा मिश्रा ☆ श्री कमलेश भारतीय ☆  कॉमेडी कर दर्शकों को हंसा कर खुशी मिलती है लेकिन खुद को सुकून संगीत में मिलता है। यह कहना है कपिल शर्मा शो, कॉमेडी सर्कस, कॉमेडी क्लासिक, लॉफ्टर चैंपियन और लॉफ्टर के फटके आदि अनेक कॉमेडी शोज में हंसाने वाली सुगंधा मिश्रा...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 21 – शख़्सियत: गुरुदत्त…6 ☆ श्री सुरेश पटवा

श्री सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं। आपकी पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी, नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास) एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है। आजकल आप  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर आपने साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत है आलेख  हिंदी फ़िल्मों के स्वर्णयुग के कलाकार  : शख़्सियत:...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 20 – शख़्सियत: गुरुदत्त…5 ☆ श्री सुरेश पटवा

श्री सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी चारों पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  आजकल वे  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर उन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत है आलेख  हिंदी फ़िल्मों...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 19 – शख़्सियत: गुरुदत्त…4 ☆ श्री सुरेश पटवा

सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी चारों पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  आजकल वे  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर उन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत है आलेख  हिंदी फ़िल्मों के...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 18 – शख़्सियत: गुरुदत्त…3 ☆ श्री सुरेश पटवा

सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी चारों पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी, पंचमढ़ी की कहानी एवं  तलवार की धार को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  आजकल वे  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर उन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत...
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हिंदी साहित्य – फिल्म/रंगमंच ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग के कलाकार # 17 – शख़्सियत: गुरुदत्त…2 ☆ श्री सुरेश पटवा

सुरेश पटवा            ((श्री सुरेश पटवा जी  भारतीय स्टेट बैंक से  सहायक महाप्रबंधक पद से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं और स्वतंत्र लेखन में व्यस्त हैं। आपकी प्रिय विधा साहित्य, दर्शन, इतिहास, पर्यटन आदि हैं।  अभी हाल ही में नोशन प्रेस द्वारा आपकी पुस्तक नर्मदा : सौंदर्य, समृद्धि और वैराग्य की  (नर्मदा घाटी का इतिहास)  प्रकाशित हुई है। इसके पूर्व आपकी तीन पुस्तकों  स्त्री-पुरुष “, गुलामी की कहानी एवं पंचमढ़ी की कहानी को सारे विश्व में पाठकों से अपार स्नेह व  प्रतिसाद मिला है।  आजकल वे  हिंदी फिल्मों के स्वर्णिम युग  की फिल्मों एवं कलाकारों पर शोधपूर्ण पुस्तक लिख रहे हैं जो निश्चित ही भविष्य में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा। हमारे आग्रह पर उन्होंने  साप्ताहिक स्तम्भ – हिंदी फिल्मोंके स्वर्णिम युग के कलाकार  के माध्यम से उन कलाकारों की जानकारी हमारे प्रबुद्ध पाठकों से साझा  करना स्वीकार किया है  जिनमें कई कलाकारों से हमारी एवं नई पीढ़ी अनभिज्ञ हैं ।  उनमें कई कलाकार तो आज भी सिनेमा के रुपहले परदे पर हमारा मनोरंजन कर रहे हैं । आज प्रस्तुत है आलेख  हिंदी फ़िल्मों के स्वर्णयुग के कलाकार ...
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