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रंगमंच स्मृतियाँ ☆ जबलपुर में साझा रंगमंच ☆ – प्रस्तुति – श्री वसंत काशीकर एवं श्री दिनेश चौधरी

श्री वसंत काशीकर ( ई- अभिव्यक्ति के माध्यम से रंगमंच स्मृतियों स्तम्भ में सहयोग के लिए  वरिष्ठ नाट्यकर्मी  एवं अग्रज श्री वसंत काशीकर जी  का हृदय से आभार। श्री वसंत काशीकर  जी को उनकी हाल ही में स्थापित की गई  कला, साहित्य  एवं संस्कृति पर आधारित संस्था 'जिज्ञासा ' की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं। जबलपुर में साझा रंगकर्म की नींव रखने में अन्य रंगकर्म संस्थाओं के संस्थापकों में आपका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वैचारिक मतभेदों के पश्चात इतनी रंगकर्म संस्थाओं का एक मंच पर आना एक ऐतिहासिक घटना है । इस सद्कार्य  के लिए सभी संस्थाओं को ई -अभिव्यक्ति का साधुवाद ) (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ...
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रंगमंच स्मृतियाँ – ☆ मौसाजी जैह‍िन्द ☆ – प्रस्तुति श्री दिनेश चौधरी

श्री दिनेश चौधरी संक्षिप्त परिचय -  रंगकर्म व लेखन-कार्य में सक्रिय। नाटकों की किताब व पुस्तिकाओं का सम्पादन व कुछ नाटकों का देश के विभिन्न नगरों में सफल मंचन। लेख, फीचर, रपट, संस्मरण, व्यंग्य-आदि देश की अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। संस्मरण और  व्यंग्य संग्रह शीघ्र-प्रकाश्य। यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए श्री दिनेश चौधरी जी का आभार।  साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा के साथ   – हेमन्त बावनकर ☆ रंगमंच स्मृतियाँ – “मौसाजी...
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रंगमंच स्मृतियाँ – ☆ डॉ श्रीराम लागू – विनम्र श्रद्धांजलि ☆

स्व डॉ श्रीराम लागू   ☆ सुप्रसिद्ध अभिनेता डॉ श्रीराम लागू नहीं रहे ☆  जन्म  - 16 नवम्बर 1927 ( सातारा ) निधन - 17 दिसंबर 2019 ( पुणे )   सुप्रसिद्ध फ़िल्म अभिनेता और रंगकर्मी श्रीराम लागू का 92 साल की उम्र में निधन हो गया. सातारा में जन्मे श्रीराम लागू पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे. उन्हें मराठी थिएटर के 20वीं सदी के सबसे बेहतरीन कलाकारों में गिना जाता है. उन्होंने 100 से अधिक हिंदी और मराठी फ़िल्मों में काम किया था तथा वे मराठी, हिंदी और गुजराती रंगमंच से भी जुड़े रहे. श्रीराम लागू ने 20 से अधिक मराठी नाटकों का निर्देशन भी किया. पेशे से ENT  विशेषज्ञ डॉ श्रीराम लागू  जी ने 42 साल की उम्र में थिएटर और फ़िल्मों की दुनिया में कदम रखा और  1969 में वह पूरी तरह मराठी थिएटर से जुड़ गए. 'नटसम्राट' नाटक में उन्होंने गणपत बेलवलकर की भूमिका निभाई थी जिसे मराठी थिएटर के लिए मील का पत्थर माना जाता है.  नटसम्राट के इस रोल के...
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रंगमंच – ☆ विवेचना का 26 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह (25 से 29 सितंबर) ☆ – श्री वसंत काशीकर

श्री वसंत काशीकर (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। इस मंच से हम रंगमंच के कार्यक्रमों को जीवंतता प्रदान करने का प्रयास करते हैं.  यदि रंगमंच से सम्बंधित कुछ प्रयोग, मंचन, उपलब्धियां आपके पास हों तो आप अवश्य साझा करें. हमें रंगमंच सम्बन्धी प्रत्येक उपलब्धि साझा करने में प्रसन्नता होगी.  आज प्रस्तुत है विवेचना के २६वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह की विशिष्ट जानकारी श्री वसंत काशीकर जी  के सौजन्य से.)   ☆ रंगमंच  – विवेचना का 26 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह (25 से 29 सितंबर) ☆ ☆ पांच चुनिंदा नाटकों का मंचन ☆   विवेचना थियेटर ग्रुप ( विवेचना, जबलपुर ) का 26 वां  राष्ट्रीय नाट्य समारोह इस वर्ष 25 सितंबर से 29 सितंबर...
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रंगमंच स्मृतियाँ – ☆ न चीनी कम ना नमक ज़्यादा ☆ – श्री अनिमेष श्रीवास्तव

श्री अनिमेष श्रीवास्तव (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए श्री अनिमेष श्रीवास्तव जी का आभार।  साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा के साथ   – हेमन्त बावनकर)      ☆ रंगमंच स्मृतियाँ – “न चीनी कम ना नमक ज़्यादा” – श्री अनिमेष श्रीवास्तव ☆   * निर्देशकीय * नियति है.. अकेलापन.. । आना भी अकेले और जाना भी.... इससे दूर रहने के लिए इंसान ने ख़ूब उपाय किये । समाज बनाया, रीति-रिवाज बनाये, नियम बनाया, क़ानून बनाये.. कि...
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हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – नाटक ☆ सदाचार का तावीज ☆ – श्री वसंत काशीकर

श्री वसंत काशीकर (“परसाई स्मृति” के लिए अपने संस्मरण /आलेख ई-अभिव्यक्ति  के पाठकों से साझा करने के लिए  संस्कारधानी  जबलपुर के वरिष्ठ  नाट्यकर्मी  श्री वसंत काशीकर जी  का हृदय से आभार।  आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं श्री काशीकर जी द्वारा परसाई जी की  रचना  का नाट्य रूपान्तरण  "सदाचार का  तावीज "।)     नाटक – सदाचार का तावीज     सूत्रधार - एक राज्य में बहुत भ्रष्टाचार था, जनता में बहुत ज्यादा विरोध था। लोग हलाकान थे। समझ में नही आ रहा था कि भ्रष्टाचारियों के साथ क्या सलूक किया जाये। बात राजा के पास पहुंची। (लोग राज दरबार को दृश्य बनाते है) राजा- (दरबारियों से) प्रजा बहुत हल्ला मचा रही है कि सब जगह भ्रष्टाचार फैला हुआ है। हमें तो आज तक कहीं दिखा। तुम्हें कहीं दिखा हो तो बताओ। दरबारी- जब हुजूर को नही दिखा तो हमें कैसे दिख सकता है। राजा- नहीं ऐसा नहीं है। कभी-कभी जो मुझे नही दिखता तुम्हें दिखता होगा। जैसे मुझे कभी बुरे सपने नही दिखते पर तुम्हें दिखते होंगे। दरबारी- जी, दिखते हैं। पर वह सपनों की बात...
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रंगमंच – स्वतन्त्रता दिवस विशेष – नाटक – ☆ स्वतन्त्रता दिवस ☆ – डॉ .कुँवर प्रेमिल

स्वतन्त्रता दिवस विशेष  डॉ कुंवर प्रेमिल   (आज प्रस्तुत है डॉ कुंवर प्रेमिल जी  द्वारा स्वतन्त्रता दिवस  के अवसर पर  रचित  सामाजिक चेतना का संदेश देता हुआ एक नाटक  “स्वतन्त्रता दिवस “। )    ☆ नाटक - स्वतन्त्रता दिवस ☆   एक मंच पर कुछेक पुरुष-महिलाएं एकत्रित हैं। वे सब विचारमग्न प्रतीत होते हैं। मंच के बाहर पंडाल में भी कुछेक पुरुष-महिलाएं-बच्चे बड़ी उत्सुकता से मंच की ओर देख रहे हैं। तभी एक विदूषक जैसा पात्र हाथ में माइक लेकर मंच पर पहुंचता है। विदूषक - भाइयों-बहिनों आज स्वतन्त्रता दिवस है। आज के दिन हमारा देश स्वतंत्र हुआ था। तभी न हम सिर उठाकर जीते हैं। अपना अन्न-पानी खाते-पीते हैं। 'हम स्वतंत्र हैं' - कहकर-सुनकर कितना अच्छा लगता है। बोलिए, लगता है कि नहीं। ' पंडाल से -  आवाजें आती हैं अच्छा लगता है जी बहुत अच्छा लगता है, बोलो स्वतन्त्रता की  जय, स्वतन्त्रता दिवस की जय। (सभी स्त्री-पुरुष स्वतन्त्रता की जय बोलते हैं।) मंच से - तभी एक महिला ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगती है- 'अरे काहे की स्वतन्त्रता, और कैसा स्वतन्त्रता दिवस।...
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रंगमंच – नाटक – ☆विश्व इतिहास की पहली महिला योद्धा  ..वीरांगना रानी दुर्गावती ☆ – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

रानी दुर्गावती बलिदान पर विशेष श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’    (प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी द्वारा रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर विशेष रूप  से लिखित नाटक। यह नाटक  बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक के लिए शिक्षाप्रद गीत, कविता एवं साक्षात्कार  का मिला जुला स्वरूप है जो अपने आप में एक प्रयोग से कम नहीं है। साथ ही यह नाटक हमें इतिहास के कई अनछुए पहलुओं से रूबरू करता है। )   ☆ नाटक - विश्व इतिहास की पहली महिला योद्धा  ..वीरांगना रानी दुर्गावती☆   पात्र- 0 गायन मंडली 1 पुरूष स्वर (1)    -    पापा 2 बालिका  - चीना 3 बालक    -  चीकू 4 खंडहर की आवाजे - (अनुगूंज में महिला स्वर) 5 पुरूष स्वर (2) 6 साक्षात्कार कर्ता   जिनसे साक्षात्कार लेना है - ०     रानी दुर्गावती  विश्वविद्यालय के कुलपति १.    कलेक्टर जबलपुर २.   संग्रहालय अध्यक्ष- जबलपुर रानी दुर्गावती संग्रहालय ३.    संग्रहालय अध्यक्ष-  मंडला ४.   संग्रहालय अध्यक्ष ..दमोह ५.   मदन महल , वीरांगना दुर्गावती की समाधि के आम पर्यटक एवं उस परिसर के दुकानदार आदि   चीना- चीकू । मैने तुमसे कोई कहानियो की किताब लाने को...
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रंगमंच स्मृतियाँ – “कोर्ट मार्शल” – श्री समर सेनगुप्ता एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव

रंगमंच स्मृतियाँ – "कोर्ट मार्शल" – श्री समर सेनगुप्ता एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव  (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए  श्री समर सेनगुप्ता जी  एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव जी का आभार।  साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा के साथ   – हेमन्त बावनकर)    "कोर्ट मार्शल" संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के व्यक्तिगत अनुदान योजना के अंतर्गत ( CFPGS) इस नाटक की प्रस्तुति विगत 18 मार्च 2019 तो शाम 7.30 बजे  मानस भवन, जबलपुर में श्री स्वदेश...
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रंगमंच/Theatre – “मूवी मेकर” – अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में चयनित – श्री दीपक तिवारी ‘दिव्य’

"मूवी मेकर" – अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में चयनित संस्कारधानी जबलपुर ने अब तक कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कलाकार देश को दिए हैं। किंतु अब शहर में बनी फिल्मों ने भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना शुरू कर दिया है। फाइव गाड फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म मूवी मेकर फिल्म को दो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अधिकारिक रूप से चयनित किया गया है। मुंबई के सबसे सम्माननीय दादा साहब फाल्के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव  2019 एवं अमेरिका के प्रतिष्ठित द लिफ्ट अप  सेशन 2019 के लिए चुना गया है। जहां इस फिल्म में शहर के कलाकार संदीप सोनकर ने लेखक, निर्माता,निर्देशक, एडिटर,डीओपी एवं अभिनेता के रूप में काम किया है। वहीं शहर के कलाकार दीपक तिवारी ने मूवी मेकर फिल्म प्रोड्यूसर का अहम किरदार निभाया है। फिल्म मूवी मेकर एक अति उत्साही युवा की कहानी है। जिसके माध्यम से हास्य एवं व्यंग की विधा का उपयोग कर फिल्मी दुनिया की जटिलताओं से युवाओं को अवगत कराने का प्रयास किया गया है। इस फिल्म के...
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