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रंगमंच – ☆ विवेचना का 26 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह (25 से 29 सितंबर) ☆ – श्री वसंत काशीकर

श्री वसंत काशीकर (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। इस मंच से हम रंगमंच के कार्यक्रमों को जीवंतता प्रदान करने का प्रयास करते हैं.  यदि रंगमंच से सम्बंधित कुछ प्रयोग, मंचन, उपलब्धियां आपके पास हों तो आप अवश्य साझा करें. हमें रंगमंच सम्बन्धी प्रत्येक उपलब्धि साझा करने में प्रसन्नता होगी.  आज प्रस्तुत है विवेचना के २६वें राष्ट्रीय नाट्य समारोह की विशिष्ट जानकारी श्री वसंत काशीकर जी  के सौजन्य से.)   ☆ रंगमंच  – विवेचना का 26 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह (25 से 29 सितंबर) ☆ ☆ पांच चुनिंदा नाटकों का मंचन ☆   विवेचना थियेटर ग्रुप ( विवेचना, जबलपुर ) का 26 वां  राष्ट्रीय नाट्य समारोह इस वर्ष 25 सितंबर से 29 सितंबर...
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रंगमंच स्मृतियाँ – ☆ न चीनी कम ना नमक ज़्यादा ☆ – श्री अनिमेष श्रीवास्तव

श्री अनिमेष श्रीवास्तव (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए श्री अनिमेष श्रीवास्तव जी का आभार।  साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा के साथ   – हेमन्त बावनकर)      ☆ रंगमंच स्मृतियाँ – “न चीनी कम ना नमक ज़्यादा” – श्री अनिमेष श्रीवास्तव ☆   * निर्देशकीय * नियति है.. अकेलापन.. । आना भी अकेले और जाना भी.... इससे दूर रहने के लिए इंसान ने ख़ूब उपाय किये । समाज बनाया, रीति-रिवाज बनाये, नियम बनाया, क़ानून बनाये.. कि...
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हिन्दी साहित्य – परसाई स्मृति अंक – नाटक ☆ सदाचार का तावीज ☆ – श्री वसंत काशीकर

श्री वसंत काशीकर (“परसाई स्मृति” के लिए अपने संस्मरण /आलेख ई-अभिव्यक्ति  के पाठकों से साझा करने के लिए  संस्कारधानी  जबलपुर के वरिष्ठ  नाट्यकर्मी  श्री वसंत काशीकर जी  का हृदय से आभार।  आज हम प्रस्तुत कर रहे हैं श्री काशीकर जी द्वारा परसाई जी की  रचना  का नाट्य रूपान्तरण  "सदाचार का  तावीज "।)     नाटक – सदाचार का तावीज     सूत्रधार - एक राज्य में बहुत भ्रष्टाचार था, जनता में बहुत ज्यादा विरोध था। लोग हलाकान थे। समझ में नही आ रहा था कि भ्रष्टाचारियों के साथ क्या सलूक किया जाये। बात राजा के पास पहुंची। (लोग राज दरबार को दृश्य बनाते है) राजा- (दरबारियों से) प्रजा बहुत हल्ला मचा रही है कि सब जगह भ्रष्टाचार फैला हुआ है। हमें तो आज तक कहीं दिखा। तुम्हें कहीं दिखा हो तो बताओ। दरबारी- जब हुजूर को नही दिखा तो हमें कैसे दिख सकता है। राजा- नहीं ऐसा नहीं है। कभी-कभी जो मुझे नही दिखता तुम्हें दिखता होगा। जैसे मुझे कभी बुरे सपने नही दिखते पर तुम्हें दिखते होंगे। दरबारी- जी, दिखते हैं। पर वह सपनों की बात...
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रंगमंच – स्वतन्त्रता दिवस विशेष – नाटक – ☆ स्वतन्त्रता दिवस ☆ – डॉ .कुँवर प्रेमिल

स्वतन्त्रता दिवस विशेष  डॉ कुंवर प्रेमिल   (आज प्रस्तुत है डॉ कुंवर प्रेमिल जी  द्वारा स्वतन्त्रता दिवस  के अवसर पर  रचित  सामाजिक चेतना का संदेश देता हुआ एक नाटक  “स्वतन्त्रता दिवस “। )    ☆ नाटक - स्वतन्त्रता दिवस ☆   एक मंच पर कुछेक पुरुष-महिलाएं एकत्रित हैं। वे सब विचारमग्न प्रतीत होते हैं। मंच के बाहर पंडाल में भी कुछेक पुरुष-महिलाएं-बच्चे बड़ी उत्सुकता से मंच की ओर देख रहे हैं। तभी एक विदूषक जैसा पात्र हाथ में माइक लेकर मंच पर पहुंचता है। विदूषक - भाइयों-बहिनों आज स्वतन्त्रता दिवस है। आज के दिन हमारा देश स्वतंत्र हुआ था। तभी न हम सिर उठाकर जीते हैं। अपना अन्न-पानी खाते-पीते हैं। 'हम स्वतंत्र हैं' - कहकर-सुनकर कितना अच्छा लगता है। बोलिए, लगता है कि नहीं। ' पंडाल से -  आवाजें आती हैं अच्छा लगता है जी बहुत अच्छा लगता है, बोलो स्वतन्त्रता की  जय, स्वतन्त्रता दिवस की जय। (सभी स्त्री-पुरुष स्वतन्त्रता की जय बोलते हैं।) मंच से - तभी एक महिला ज़ोर-ज़ोर से चीखने लगती है- 'अरे काहे की स्वतन्त्रता, और कैसा स्वतन्त्रता दिवस।...
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रंगमंच – नाटक – ☆विश्व इतिहास की पहली महिला योद्धा  ..वीरांगना रानी दुर्गावती ☆ – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

रानी दुर्गावती बलिदान पर विशेष श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’    (प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी द्वारा रानी दुर्गावती बलिदान दिवस पर विशेष रूप  से लिखित नाटक। यह नाटक  बच्चों से लेकर वरिष्ठ नागरिकों तक के लिए शिक्षाप्रद गीत, कविता एवं साक्षात्कार  का मिला जुला स्वरूप है जो अपने आप में एक प्रयोग से कम नहीं है। साथ ही यह नाटक हमें इतिहास के कई अनछुए पहलुओं से रूबरू करता है। )   ☆ नाटक - विश्व इतिहास की पहली महिला योद्धा  ..वीरांगना रानी दुर्गावती☆   पात्र- 0 गायन मंडली 1 पुरूष स्वर (1)    -    पापा 2 बालिका  - चीना 3 बालक    -  चीकू 4 खंडहर की आवाजे - (अनुगूंज में महिला स्वर) 5 पुरूष स्वर (2) 6 साक्षात्कार कर्ता   जिनसे साक्षात्कार लेना है - ०     रानी दुर्गावती  विश्वविद्यालय के कुलपति १.    कलेक्टर जबलपुर २.   संग्रहालय अध्यक्ष- जबलपुर रानी दुर्गावती संग्रहालय ३.    संग्रहालय अध्यक्ष-  मंडला ४.   संग्रहालय अध्यक्ष ..दमोह ५.   मदन महल , वीरांगना दुर्गावती की समाधि के आम पर्यटक एवं उस परिसर के दुकानदार आदि   चीना- चीकू । मैने तुमसे कोई कहानियो की किताब लाने को...
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रंगमंच स्मृतियाँ – “कोर्ट मार्शल” – श्री समर सेनगुप्ता एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव

रंगमंच स्मृतियाँ – "कोर्ट मार्शल" – श्री समर सेनगुप्ता एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव  (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए  श्री समर सेनगुप्ता जी  एवं श्री अनिमेष श्रीवास्तव जी का आभार।  साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा के साथ   – हेमन्त बावनकर)    "कोर्ट मार्शल" संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के व्यक्तिगत अनुदान योजना के अंतर्गत ( CFPGS) इस नाटक की प्रस्तुति विगत 18 मार्च 2019 तो शाम 7.30 बजे  मानस भवन, जबलपुर में श्री स्वदेश...
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रंगमंच/Theatre – “मूवी मेकर” – अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में चयनित – श्री दीपक तिवारी ‘दिव्य’

"मूवी मेकर" – अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सवों में चयनित संस्कारधानी जबलपुर ने अब तक कई राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कलाकार देश को दिए हैं। किंतु अब शहर में बनी फिल्मों ने भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना शुरू कर दिया है। फाइव गाड फिल्म्स के बैनर तले बनी फिल्म मूवी मेकर फिल्म को दो अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अधिकारिक रूप से चयनित किया गया है। मुंबई के सबसे सम्माननीय दादा साहब फाल्के अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव  2019 एवं अमेरिका के प्रतिष्ठित द लिफ्ट अप  सेशन 2019 के लिए चुना गया है। जहां इस फिल्म में शहर के कलाकार संदीप सोनकर ने लेखक, निर्माता,निर्देशक, एडिटर,डीओपी एवं अभिनेता के रूप में काम किया है। वहीं शहर के कलाकार दीपक तिवारी ने मूवी मेकर फिल्म प्रोड्यूसर का अहम किरदार निभाया है। फिल्म मूवी मेकर एक अति उत्साही युवा की कहानी है। जिसके माध्यम से हास्य एवं व्यंग की विधा का उपयोग कर फिल्मी दुनिया की जटिलताओं से युवाओं को अवगत कराने का प्रयास किया गया है। इस फिल्म के...
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रंगमंच स्मृतियाँ – “कफन” – श्री समर सेनगुप्ता

रंगमंच स्मृतियाँ – “कफन” – श्री समर सेनगुप्ता (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। इस प्रयास में  सहयोग के लिए e-abhivyakti श्री समर सेनगुप्ता जी का आभार व्यक्त करता है। साथ ही भविष्य में सार्थक सहयोग की अपेक्षा करता है  – हेमन्त बावनकर)    कफन  यह नाटक मुंशी प्रेमचंद की कालजयी कहानी "कफन" पर आधारित है। भारतीय समाज का गठन बहुत ही  निर्मम ढंग से हुआ है. मेहनत-मशक्कत से आजीविका चलानेवालों को निम्न वर्ग में रखा गया है और दूसरों की...
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रंगमंच नाटिका – “राह” – आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' नाटिका राह (स्मरण महीयसी महादेवी वर्मा जी: १)  संवाद शैली में संस्मरणात्मक लघु नाटिका   १. राह एक कमरे का दृश्य: एक तख़्त, दो कुर्सियाँ एक मेज। मेज पर कागज, कलम, कुछ पुस्तकें, कोने में कृष्ण जी की मूर्ति या चित्र, सफ़ेद वस्त्रों में आँखों पर चश्मा लगाए एक युवती और कमीज, पैंट, टाई, मोज़े पहने एक युवक बातचीत कर रहे हैं। युवक कुर्सी पर बैठा है, युवती तख़्त पर बैठी है। नांदीपाठ: उद्घोषक: दर्शकों! प्रस्तुत है एक संस्मरणात्मक लघु नाटिका 'विश्वास'। यह नाटिका जुड़ी है एक ऐसी गरिमामयी महिला से जिसने पराधीनता के काल में, परिवार में स्त्री-शिक्षा का प्रचलन न होने के बाद भी न केवल उच्च शिक्षा ग्रहण की, अपितु देश के स्वतंत्रता सत्याग्रह में योगदान किया, स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में असाधारण कार्य किया, हिंदी साहित्य की अभूतपूर्व श्रीवृद्धि की, अपने समय के सर्व श्रेष्ठ पुरस्कारों के लिए चुनी गयी, भारत सरकार ने उस पर डाक टिकिट निकाले, उस पर अनेक शोध कार्य हुए, हो रहे हैं और होते रहेंगे। नाटिका का नायक एक...
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रंगमंच स्मृतियाँ – “काल चक्र” – श्री असीम कुमार दुबे

रंगमंच स्मृतियाँ – “काल चक्र” – श्री असीम कुमार दुबे (यह विडम्बना है कि  – हम सिनेमा की स्मृतियों को तो बरसों सँजो कर रखते हैं और रंगमंच के रंगकर्म को मंचन के कुछ दिन बाद ही भुला देते हैं। रंगकर्मी अपने प्रयास को आजीवन याद रखते हैं, कुछ दिन तक अखबार की कतरनों में सँजो कर रखते हैं और दर्शक शायद कुछ दिन बाद ही भूल जाते हैं। कुछ ऐसे ही क्षणों को जीवित रखने का एक प्रयास है “रंगमंच स्मृतियाँ “। यदि आपके पास भी ऐसी कुछ स्मृतियाँ हैं तो आप इस मंच पर साझा कर सकते हैं। – हेमन्त बावनकर)    काल चक्र - मानवीय संवेदनाओं का बयां करता नाटक   संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से कोशिश नाट्य संस्था की ओर से भारत भवन के अंतरंग सभागार में रंगकर्मी श्री असीम कुमार दुबे के निर्देशन में नाटक 'काल चक्र' का मंचन किया गया। इस नाटक का मंचन 13 वर्ष बाद कुछ बदलाव के बाद दुबारा किया गया। इससे पहले यह...
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