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मराठी साहित्य – चित्रपटावर बोलू काही ☆ राकेट्री (हिंदी सिनेमा) – दिग्दर्शक – आऱ्. माधवन ☆ श्री उदय गोपीनाथ पोवळे ☆

श्री उदय गोपीनाथ पोवळे  चित्रपटावर बोलू काही  ☆ Rocketry (हिंदी सिनेमा) - दिग्दर्शक - आऱ्. माधवन ☆ श्री उदय गोपीनाथ पोवळे ☆ आज Rocketry हा हिंदी सिनेमा बघण्याचा योग आला. योगच म्हणावे लागेल कारण गेल्या आठवड्यापासून तो सिनेमा बघण्याचे मनात असले तरी वेळ काढता आला नाही. आज मात्र ठरवून रॉकेट्री सिनेमा बघितला. डॉक्टर विक्रम साराभाईंनी ज्यांच्यावर मुलासारखं प्रेम केलं, ज्यांच्या प्रचंड बुद्धीमत्तेवर विश्वास ठेवला, ज्यांचा विक्षिप्तपणा सांभाळून घेतला, तेच डॉ. नंबी नारायणन ह्यांच्या आयुष्यावर चित्रित केलेला हा सिनेमा. आर. माधवन ह्या अभिनेत्याने हा चित्रपट दिग्दर्शित केला आहे , आणि स्वतःच डॉ. नंबी नारायणन ह्यांची भूमिका केली आहे. हा सिनेमा बनवून, त्याने आपल्या भारत देशातील सगळ्या देशवासीयांसमोर एक असा काही नजराणा ठेवला आहे की तो आपण प्रत्येकाने स्वीकारून त्याचा नुसता आस्वाद न घेता, त्याचे स्मरण आपल्या आयुष्यात कायम राहील ह्याची खात्री बाळगली पाहिजे.  डॉ एस. नंबी नारायणन (जन्म १२ डिसेंबर १९४१ ) हे रॉकेट वैज्ञानिक आणि एरोस्पेस अभियंता होते , ज्यांनी भारतीय अंतराळ संशोधन संस्था ( ISRO ) इथे काम केले आणि विकास रॉकेट इंजिनच्या विकासात योगदान दिले. २०१९ मध्ये...
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मराठी साहित्य – चित्रपटावर बोलू काही ☆ मेजर… निर्देशक – शशि किरण टिक्का ☆ श्री उदय गोपीनाथ पोवळे ☆

श्री उदय गोपीनाथ पोवळे  चित्रपटावर बोलू काही  ☆ मेजर… निर्देशक - शशि किरण टिक्का ☆ श्री उदय गोपीनाथ पोवळे ☆ मेजर संदीप उन्नीकृष्णन आज दिनांक ६-६-२०२२ ला असा एक सिनेमा बघण्याचा योग आला की तो सिनेमा बघून भूतकाळात घडलेले ते दोन, तीन  दिवस पुन्हा डोळ्यांसमोर आले. २६-११-२००८ ते २९-११-२००८ ह्या तीन दिवसांत पाकिस्तानमधल्या लष्करे तयबा ह्या इस्लामिस्ट टेररिस्ट ऑर्गनाजेशनच्या दहा अतिरेक्यांनी जवळजवळ १६६ जणांना जीवानिशी मारले होते आणि त्या दिवशी तुकाराम ओंबळे साहेबांमुळे एक अतिरेकी जिवंत पकडला गेला तर बाकीच्या ९ अतिरेकीना मुंबई पोलिसांनी आणि आपल्या NSG कमांडोनी यमसदनास पाठविले होते. जे काही घडले होते आणि ज्यांनी कोणी टीव्ही वर ते पहिले होते, ते कोणीही, कधीही विसरू शकणार नाहीत पण त्या दिवशी ज्यांनी कोणी आपले प्राण पणाला लावून ह्या आपल्या देशासाठी, आपल्या देशातल्या माणसांसाठी आपल्या आयुष्याची आहुती देऊन त्या अतिरेक्यांना मारून शहीद झाले त्यांच्याबद्दल आपल्याला खूप कमी माहिती असते आणि आज आम्ही जो सिनेमा बघितला त्या सिनेमाने आम्हांला आज अशाच एका शहीद झालेल्या आपल्या जवानाची खरी ओळख करून दिली. अशोकचक्रवीर मेजर संदीप उन्नीकृष्णनवर आलेला सिनेमा,  "...
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मराठी साहित्य – चित्रपटावर बोलू काही ☆ दि बुक थीफ… दिग्दर्शक – ब्रायन पर्सिवल ☆ परिक्षण – सुश्री तृप्ती कुलकर्णी ☆

सुश्री तृप्ती कुलकर्णी 🎞️ चित्रपटावर बोलू काही 🎞️ ☆ दि बुक थिफ … दिग्दर्शक - ब्रायन पर्सिवल ☆ परिक्षण – सुश्री तृप्ती कुलकर्णी ☆ युद्धातल्या खऱ्या रम्यकथा… मार्कस झुसॅक यांच्या कादंबरीवर आधारित दिग्दर्शक - ब्रायन पर्सिवल सध्या आपण रशिया आणि युक्रेन यांच्या युद्धाच्या बातम्या ऐकतो आहोत, पाहतो आहोत आणि या युद्धाचे इतर देशांवर होणारे प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष, गंभीर-किरकोळ स्वरूपाचे परिणामदेखील पहात आहोत, अनुभवत आहोत. यावरून माझ्या एकच लक्षात आलं की आता युद्ध ही संकल्पना कुठल्याही ठराविक भौगोलिक, सांस्कृतिक, राजकीय किंवा सामाजिक सीमेपुरती मर्यादित राहिलेली नाही. तर ती पृथ्वीच्या कुठल्याही एका बिंदूपासून सुरू होऊन हळूहळू संपूर्ण पृथ्वीला कह्यात घेते... आणि एका विषयापासून सुरू होऊन इतर अनेक विषयांनाही कवेत घेते. भूतकाळ, वर्तमानकाळ, भविष्यकाळ या तीनही काळांचा संबंध युद्ध या संकल्पनेशी घट्ट रुजलेला आहे. त्यामुळे आधी घडून गेलेल्या काही युद्धांच्या कथा जरी अत्यंत विनाशकारी असल्या तरी आजही पुन्हा पुन्हा आठवल्या जातात. त्यावर पुन्हा पुन्हा चर्चा घडत राहते. आणि हळूहळू या कथा निरनिराळ्या साहित्यकृतींचं ही आकर्षण ठरतात. दुसरं महायुद्ध हे आजही अनेकदा चर्चिलं जातं, आणि त्याबरोबरच चर्चिला जातो तो या युद्धाचं केंद्रस्थान असलेला,...
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सूचनाएँ/Information – ☆ रंगमंच/Theatre ☆ विवेचना, जबलपुर का 27 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह – 23 से 27 मार्च 2022 ☆ श्री हिमांशु राय ☆

सूचनाएँ/Information (साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार) ☆ विवेचना, जबलपुर का 27 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह - 23 से 27 मार्च 2022 ☆ श्री हिमांशु राय ☆   6 नायाब नाटकों का मंचन होगा 23 से 27 मार्च 2022 तकविवेचना का 27 वां राट्रीय नाट्य समारोह वसंत काशीकर की स्मृति को समर्पित है यह समारोह अमृतसर, जम्मू, दिल्ली और भोपाल के बहुरंगी नाटकों से सजा है समारोह भगतसिंह पर केन्द्रित नाटक वसंती चोला से होगी शुरूआत पंजाब के लोकगायक गाएंगे वीरों की गाथा काव्य पाठ, नृत्य, संगीत से सजा होगा प्रतिदिन पूर्वरंग विवेचना थियेटर ग्रुप (विवेचना, जबलपुर) का 27 वां राष्ट्रीय नाट्य समारोह इस वर्ष 23 से 27 मार्च 2022 तक आयोजित होगा। समारोह की शुरूआत 23 मार्च को भगतसिंह शहादत दिवस पर भगतसिंह पर केन्द्रित नाटक ’बसंती चोला’ से होगी। इस नाटक का निर्देशन देश के जाने माने नाट्य निर्देशक केवल धालीवाल ने किया है। 23 मार्च शहादत दिवस के लिए पंजाब के प्रसिद्ध लोकगायकों का दल जबलपुर आ रहा है जो ’बसंती चोला’ के मंचन से पहले वीरों की...
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हिन्दी साहित्य – साप्ताहिक स्तम्भ ☆ विवेक साहित्य # 113 ☆ रंगमंच – नर्मदा परिक्रमा की कथा ☆ श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  (प्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक साहित्य ”  में हम श्री विवेक जी की चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं। श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, अतिरिक्त मुख्यअभियंता सिविल  (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी , जबलपुर ) से सेवानिवृत्त हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। आपको वैचारिक व सामाजिक लेखन हेतु अनेक पुरस्कारो से सम्मानित किया जा चुका है। आज प्रस्तुत है श्री विवेक जी  द्वारा रचित नाटक नर्मदा परिक्रमा की कथा। इस विचारणीय विमर्श के लिए श्री विवेक रंजन जी की लेखनी को नमन।) ☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # 113 ☆ नाटक - नर्मदा परिक्रमा की कथा (समाहित संदेश...  नदियो का सामाजिक महत्व) नांदी पाठ...   पुरुष स्वर... हिन्दू संस्कृति में धार्मिक पर्यटन का बड़ा महत्व है, नदियो, पर्वतो, वनस्पतियों तक को देवता स्वरूप में कल्पना कर उनकी परिक्रमा का विधान हमारी संस्कृति की विशेषता है.नदियो का धार्मिक महत्व प्रतिपादित किया गया है, जिससे जन मन में जल...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -9 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 9 ☆  संजय भारद्वाज *प्रवेश तीन* (अनुराधा चुपचाप बैठी है। विचारमग्न है। रमेश का प्रवेश।) रमेश- क्या हुआ अनुराधा? अनुराधा- कुछ नहीं।  यों...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -8 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 8 ☆  संजय भारद्वाज *प्रवेश दो* (रमणिकलाल नामक छुटभैया नेता का कमरा। पीछे किसी राष्ट्रीय नेता की तस्वीर लगी हुई है।...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -7 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 7 ☆  संजय भारद्वाज द्वितीय अंक - प्रवेश एक (विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पंत लेक्चर ले रहे हैं। केवल एक ब्लैकबोर्ड, मेज...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच/सिनेमा ☆ मुंबई में “का बा” के गीतकार – डॉ. सागर ☆ सुश्री मनिषा खटाटे

सुश्री मनिषा खटाटे  ☆ रंगमंच/सिनेमा ☆ मुंबई में "का बा" के गीतकार – डॉ. सागर ☆  सुश्री मनिषा खटाटे☆  पिछले वर्ष मुंबई में "का बा" यह गीत मशहूर हुआ. यह गीत प्रसिद्ध अभिनेता मनोज बाजपेयी ने गाया और उन्हीं के उपर फिल्माया गया. यह गीत भोजपुरी भाषा में हैं. परंतु यथार्थवाद और सामाजिक संघर्ष की कहानी व्यक्त करने में स्वयं ही सक्षम हैं. सिनेमा भी साहित्य की तरह एक संरचना हैं. डाँ.सागर सिनेमा, गीत और साहित्य के इंद्रधनुष  हैं. बॉलीवुड में बलिया, उत्तरप्रदेश से आकर डा. सागर अपने गीतों मे तितलियों के रंग भरते हैं और उन्हे बेचने के लिये वे जे.एन.यु. से बॉलीवुड आ जाते है. डॉ. सागर के दादी का यह सपना उनके दिल की धड़कन बन जाता है और बॉलीवुड  पर छा जाता है, यह गीतों का सपना श्रेया घौषाल से लेकर तमाम महान गायको की आवाज से गूँजता हैं. शोरगुल की इस मायानगरी मे डॉ. सागर एक अजूबा गीतकार है. डॉ सागर का यह सफर किसी फिल्मी कहानी...
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हिन्दी साहित्य – रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत -6 ☆ श्री संजय भारद्वाज

श्री संजय भारद्वाज  (श्री संजय भारद्वाज जी – एक गंभीर व्यक्तित्व । जितना गहन अध्ययन उतना ही  गंभीर लेखन।  शब्दशिल्प इतना अद्भुत कि उनका पठन ही शब्दों – वाक्यों का आत्मसात हो जाना है।साहित्य उतना ही गंभीर है जितना उनका चिंतन और उतना ही उनका स्वभाव। संभवतः ये सभी शब्द आपस में संयोग रखते हैं  और जीवन के अनुभव हमारे व्यक्तित्व पर अमिट छाप छोड़ जाते हैं।  हम आपको प्रति रविवार उनके साप्ताहिक स्तम्भ – संजय उवाच शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक  पहुँचा रहे हैं। सप्ताह के अन्य दिवसों पर आप उनके मनन चिंतन को  संजय दृष्टि के अंतर्गत पढ़ रहे थे। हम संजय दृष्टिश्रृंखला को कुछ समय के लिए विराम दे रहे हैं । प्रस्तुत है  रंगमंच स्तम्भ के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य नाटक प्रमाणन बोर्ड द्वारा मंचन के लिए प्रमाणपत्र प्राप्त धारावाहिक स्वरुप में श्री संजय भारद्वाज जी का सुप्रसिद्ध नाटक “एक भिखारिन की मौत”। ) रंगमंच ☆ दो अंकी नाटक – एक भिखारिन की मौत – 6 ☆  संजय भारद्वाज रमेश-  वाह मान गए मधु वर्मा। वेरी गुड शॉट विद क्लासिक टच ऑफ सेंटीमेंट्स एंड रियलिटी। मधु-थैंक्यू। रमेश- बाय...
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