(श्री सुजित कदम जी की कवितायेँ /आलेख/कथाएँ/लघुकथाएं अत्यंत मार्मिक एवं भावुक होती हैं। इन सबके कारण हम उन्हें युवा संवेदनशील साहित्यकारों में स्थान देते हैं। उनकी रचनाएँ हमें हमारे सामाजिक परिवेश पर विचार करने हेतु बाध्य करती हैं। श्री सुजित जी की रचनाएँ “साप्ताहिक स्तम्भ – सुजित साहित्य” के अंतर्गत प्रत्येक गुरुवार को आप पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है उनकी कविता ऋतू हिरवा….।)
(आज प्रस्तुत है सुश्री प्रभा सोनवणे जी के साप्ताहिक स्तम्भ “कवितेच्या प्रदेशात” में उनकी एक बाल कविता “सार्थक आणि लक्ष्य”। हिन्दी में एक कहावत है “मूलधन से ब्याज प्रिय होता है “। सभी दादा दादी/नाना नानी को अपने नाती पोते सर्वप्रिय होते हैं। मैं क्या आप सभी सुश्री प्रभा जी के कथन से सहमत होंगे ।
“नातवंडे प्रत्येक आजी आजोबांना खुप प्रिय असतात, त्यांच्या बाललीला पहाणं हे एक *आनंद पर्व* असतं ,एका लग्न समारंभात माझ्या नातवाकडे पाहून एक महिला मला म्हणाली, “तुमचा नातू गोड आहे” यावर पाच वर्षाचा माझा नातू पटकन म्हणाला होता, “सगळे नातू गोडच असतात”. याच माझ्या नातवाच्या -सार्थक च्या मैत्रीची एक कविता….” – प्रभा सोनवणे
अब आप प्रत्येक बुधवार को सुश्री प्रभा जी का साप्ताहिक स्तम्भ – “कवितेच्या प्रदेशात” पढ़ सकते हैं । )
(वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे जी का अपना एक काव्य संसार है । साप्ताहिक स्तम्भ अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती शृंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है एक कवि के हृदय में काव्य सृजन की प्रक्रिया को उजागर करती उनकी कविता “शस्त्रक्रिया”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती # 4 ☆
(श्रीमती रंजना मधुकरराव लसणे जी हमारी पीढ़ी की वरिष्ठ मराठी साहित्यकार हैं। सुश्री रंजना इस एक अत्यंत संवेदनशील शिक्षिका एवं साहित्यकार हैं। सुश्री रंजना जी का साहित्य जमीन से जुड़ा है एवं समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। निश्चित ही उनके साहित्य की अपनी एक अलग पहचान है। अब आप उनकी अतिसुन्दर रचनाएँ प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे। मानसून ने हमारे द्वार पर दस्तक दे दी है एवं इसी संदर्भ में आज प्रस्तुत है उनकी एक सामयिक रचना “मान्सून।”)
(सुप्रसिद्ध युवा कवियित्रि सुश्री स्वप्ना अमृतकर जी का अपना काव्य संसार है । आपकी कई कवितायें विभिन्न मंचों पर पुरस्कृत हो चुकी हैं। आप कविता की विभिन्न विधाओं में दक्ष हैं और साथ ही हायकू शैली की सशक्त हस्ताक्षर हैं। आपने कविता के साप्ताहिक स्तम्भ के लिए हमारे आग्रह को स्वीकार किया, इसके लिए हम हृदय से आपके आभारी हैं। हम आपका “साप्ताहिक स्तम्भ – स्वप्ना की कवितायें “ शीर्षक से प्रारम्भ कर रहे हैं। वर्षा ऋतु ने हमारे द्वार पर दस्तक दी है। सुश्री स्वप्ना जी के ही शब्दों में “पावसाळ्याची सुरुवात आहे.. आता सगळ्या कवींचे, लेखकांचे मन जागे होते लिखाणासाठी .. म्हणून ह्या वेळेसचे साहित्य “ । इस शृंखला में प्रथम पाँच कवितायें वर्षा ऋतु पर आधारित हैं जो आप प्रत्येक शनिवार को पढ़ सकते हैं। आज प्रस्तुत है सुश्री स्वप्ना जी की हायकू शैली में कविता “कोरडा डोह”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – स्वप्ना अमृतकर यांची कविता अभिव्यक्ती # -1 ☆
(श्री सुजित कदम जी की कवितायेँ /आलेख/कथाएँ/लघुकथाएं अत्यंत मार्मिक एवं भावुक होती हैं। इन सबके कारण हम उन्हें युवा संवेदनशील साहित्यकारों में स्थान देते हैं। उनकी रचनाएँ हमें हमारे सामाजिक परिवेश पर विचार करने हेतु बाध्य करती हैं। श्री सुजित जी की रचनाएँ “साप्ताहिक स्तम्भ – सुजित साहित्य” के अंतर्गत प्रत्येक गुरुवार को आप पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है उनकी कविता शिकवण।)
(वरिष्ठ मराठी साहित्यकार श्री अशोक श्रीपाद भांबुरे जी का अपना एक काव्य संसार है । साप्ताहिक स्तम्भ अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती शृंखला की अगली कड़ी में प्रस्तुत है अप्रतिम मराठी गीत गझल गीत गाण्यासाठी जिसे प्रख्यात गायक एवं संगीतकार श्री राजेश दातार जी ने स्वरबद्ध किया है। इसके साथ ही प्रस्तुत है स्थिर-चित्र आडियो /वीडियो यूट्यूब लिंक । )
☆ अशोक भांबुरे जी यांची कविता अभिव्यक्ती # 3 ☆
गझल गीत गाण्यासाठी
(Please Click ⇑⇑⇑⇑ to hear song or click on YouTube Link >> गझल गीत गाण्यासाठी )
पाखरात कोकिळ गातो तसे गाऊ दे रे गजल गीत गाण्यासाठी सूर लावू दे रे
शब्दफुलांच्या या बागा नकोना पहारे तिच्या मोरपंखी ओळी आणती शहारे
अभिषेक कानावरती रोज होऊ दे रे
गोटीबंद आहे गजला परि जीव घेण्या एक एक शब्दांच्या या शेकडो कहाण्या दु:ख असे भळभळणारे मला पाहू दे रे
दु:ख सुखाच्या रे येथे किती येरझारा कधी शब्द घुसमटणारे कधी थंड वारा ब्रीद जीवनाचे सारे मला मांडू दे रे
शब्द कोण घेऊन आले पहाट पहाटे कोवळीच सुमने येथे नसे तिथे काटे
(श्रीमती रंजना मधुकरराव लसणे जी हमारी पीढ़ी की वरिष्ठ मराठी साहित्यकार हैं। सुश्री रंजना इस एक अत्यंत संवेदनशील शिक्षिका एवं साहित्यकार हैं। सुश्री रंजना जी का साहित्य जमीन से जुड़ा है एवं समाज में एक सकारात्मक संदेश देता है। निश्चित ही उनके साहित्य की अपनी एक अलग पहचान है। अब आप उनकी अतिसुन्दर रचनाएँ प्रत्येक सोमवार को पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है भावप्रवण गीत – वृत्त वियदगंगा)
(समाज , संस्कृति, साहित्य मेंही नहीं अपितु सोशल मीडिया में गहरी पैठ रखने वालेकविराज विजय यशवंत सातपुते जी कीसोशल मीडियाकीटेगलाइन“माणूस वाचतो मी……!!!!”ही काफी है उनके बारे में जानने के लिए। जो साहित्यकार मनुष्य को पढ़ सकता है वह कुछ भी और किसी को भी पढ़ सकने की क्षमता रखता है।आप कई साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हुए हैं । अब आप प्रत्येक शुक्रवार को उनके मानवीय संवेदना के सकारात्मक साहित्य को पढ़ सकेंगे।आज इस लेखमाला की शृंखला में पढ़िये “पुष्प दुसरा – पर्यावरण नाते ….!” ।)