मोहम्मद जिलानी
(ई-अभिव्यक्ति में वरिष्ठ शिक्षाविद एवं साहित्यकार मोहम्मद जिलानी जी का हार्दिक स्वागत.शिक्षण – बी.ए., बी एड, एम ए (अंग्रेजी, हिंदी, समाजशास्त्र), एम एड विशेष – यू के में एक सप्ताह का शैक्षणिक दौरा. सेवाएं – व्याख्याता (अंग्रेजी और हिंदी) के पद पर सेवाएं प्रदत्त, इसके पश्चात् प्रधानाध्यापक और प्राचार्य पद पर सेवाएं प्रदत्त, तत्पश्चात उप शिक्षा अधिकारी, जिला परिषद् चंद्रपुर के पद से सेवानिवृत्त. अभिरुचि – हिंदी, अंग्रेजी, मराठी, उर्दू, और तेलुगु भाषा में पठन, लेखन. गीत, संगीत और सिनेमा में भी विशेष अभिरुचि. संप्रति – निदेशक जिलानी ग्रुप ऑफ़ स्कूल्स। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – आशियाना.)
🌱 लघुकथा – आशियाना 🌷
“चल भाग यहां से कब्रिस्तान के चौकीदार ने सोते हुए भिखारी को फटकार लगायी. भिखारी शमशू को उठाते हुए कहा – “भय्ये सिर्फ रात भर ही तो सोता हूँ. किसी को क्या तकलीफ हो रही है?”
“अरे भाई समझता क्यों नही. यह कब्रिस्तान है. रिश्तेदार एतराज करते हैं.”
“भला इसमे एतराज की क्या बात है?”
“इन्हे भी तो सुकून चाहिए. फिर आये दिन जादूटोना के लिए मांत्रिक कब्र खोदकर मुर्दे गायब करते हैं. मैंने तुझे कई बार समझाया, पर तू बाज़ नही आता” यह कहते हुए साथ आई पुलिस के हवाले कर दिया. पुलिस स्टेशन के दरोगा ने कडक आवाज मे पूछा. “क्यों बे मुर्दे चुराता है?”
शमशू डरते हुए बोले “हूजूर मजबूरी मे सोता हूँ.”
“अब यह सब नहीं चलेगा. कहीं और ठिकाना ढूंढो”
“हुजूर कहां ढूंढू. मस्जिद या मंदिर के पास सोता हूं तो हकाल देते हैं. धार्मिक या सरकारी संस्थान के आसपास आने नही देते. फुटपाथ पर सोते हैं तो कब कोई पियक्कड़ गाड़ी में कुचल दे, कोई भरोसा नहीं. बच गए तो लंगड़ा-लूला बनकर ज़िन्दगी गुजारो.”
“इसमे पुलिस क्या कर सकती है?”
“कम से कम हमें कब्रिस्तान मे सोने दीजिए. जहाँ डर की बजाए शांति तो है.”
यह सुनकर स्तब्ध होकर दरोगा महात्मा गांधी जी की तस्वीर की ओर देखने लगा.
© मोहम्मद जिलानी
संपर्क – चंद्रपुर (महाराष्ट्र) मो 9850352608 (व्हाट्सएप्प), 8208302422
≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈




