श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की  प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं  में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना अपनी माटी से जुड़ाव का पर्व। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  – आलेख  # २५६  ☆ अपनी माटी से जुड़ाव का पर्व

लंबोदर अर्थात बड़े पेट वाला, भारतीय संस्कृति में गणेश जी के लिए यह शब्द प्रयुक्त होता है। इस वर्ष 27 अगस्त 2025 को गणेश चतुर्थी का उत्सव मनाया गया। घर- घर में मिट्टी से बनें गणेश जी की मूर्ति स्थापित हुयी। इसी के साथ दस दिवसीय पर्व शुरू हुआ। नित्य सुबह शाम आरती, चंदन, वंदन साथ ही मोदक मिष्ठान का भोग लगाना। दूब घास, गुड़हल पुष्प की माला आपको प्रिय है। रिद्धि- सिद्धि, शुभ- लाभ सहित गजानन हमारे घर विराजित हैं। 06 सितंबर 2025, अनन्त चौदस के दिन पूजा, आरती, भोग, हवन पश्चात जल के कुंड में विसर्जन किया जाता है। पर्यावरण की सुरक्षा हेतु हम घर में विसर्जन करें, उसके पश्चात जो मिट्टी व जल बचेगा उसे गमले में रखकर उसमें पौधा लगाएँ जिससे पूरे वर्ष भर हमें बप्पा का साथ मिलता रहे। अगले बरस तू जल्दी आ इसी उद्घोष के साथ विघ्नहर्ता, गजानन, एकदन्त, दयावंत, प्रथमेश, प्रथम पूज्य, गणराज, मंगलमूर्ति, गौरीसुत आपकी कृपा दृष्टि सभी भक्तों पर सदैव बनीं रहे।

*

मास भादो की चतुर्थी, शुक्ल का चंदा सजा।

मातु गौरी के गजानन, राग मंगलमय बजा।।

नाम लंबोदर कहाया, तात शिव शंकर कहे।

नाथ पूजा आपकी हो, लाभ संगत शुभ रहे।।

**

©  श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’

माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020

मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments