श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है आपका एक – गीत – लेकर हाथ कनक पिचकारी… । आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # २९५ ☆
☆ गीत – लेकर हाथ कनक पिचकारी… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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लेकर हाथ कनक पिचकारी |
होली खेलें कृष्ण मुरारी ||
झूम-झूम कर नाचे राधा,
निरखें सखियाँ बारी-बारी ||
लेकर हाथ कनक पिचकारी ||
*
मिटी सभी आपस की दूरी।
हुई कामना सबकी वी पूरी।
रँग खुशी के बिखर रहे हैं,
मिली प्रेम की है कस्तूरी।
लगे न युवती आज कुँवारी |
लेकर हाथ कनक पिचकारी ||
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आज शत्रु भी लगता भाई।
होली ने दुश्मनी मिटाई ।
पढ़ते आज सभी मिल मानो,
सधे प्रेम के अक्षर ढाई।
मन भाए हैं। हृदय बिहारी |
लेकर हाथ कनक पिचकारी ||
*
फूला टेसू भी इतराये |
रंगों का मतलब समझाये।
मन भाती फूलों की होली ,
रंग – रसायन हमें न भाये।
गारी आज लगे अति प्यारी |
लेकर हाथ कनक पिचकारी ||
*
फागुन बौरा कर ज्यों आया |
रंग प्यार के अद्भुत लाया ||
ढोल – मृदंग चंग सब बाजें,
सबका हृदय देख हर्षाया।
मिलता है “संतोष” सभी को,
आज उड़ेलो मस्ती सारी ||
लेकर हाथ कनक पिचकारी |
रँग खेल रहे कृष्ण मुरारी ||
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






