श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 ₹51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है श्री राजकुमार जैन ‘राजन‘ जी द्वारा संपादित पुस्तक – “वर्ष 2021 का हिंदी बाल साहित्य : एक आकलन” की समीक्षा।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २४४ ☆
☆ पुस्तक समीक्षा – वर्ष 2021 का हिंदी बाल साहित्य: क आकलन – लेखक/संपादक: राजकुमार जैन ‘राजन‘ ☆ समीक्षक – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
पुस्तक का नाम: वर्ष 2021 का हिंदी बाल साहित्य : एक आकलन
लेखक/संपादक: राजकुमार जैन ‘राजन‘
विधा: बाल साहित्य समीक्षा
प्रकाशक: ज्ञान मुद्रा पब्लिकेशन, भोपाल
समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश‘
☆ बाल साहित्य की परख और पहचान का नया दस्तावेज़ ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
आज के डिजिटल युग में जब बच्चों का अधिकांश समय मोबाइल और इंटरनेट के बीच बीतने लगा है, तब अच्छी और संस्कारप्रद पुस्तकों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक महसूस की जा रही है। किंतु समस्या यह है कि बाजार में उपलब्ध असंख्य पुस्तकों के बीच से बालकों के लिए उपयोगी और गुणवत्तापूर्ण साहित्य का चयन कैसे किया जाए। इसी प्रश्न का सार्थक समाधान प्रस्तुत करती है राजकुमार जैन ‘राजन’ की महत्वपूर्ण कृति वर्ष 2021 का हिंदी बाल साहित्य : एक आकलन। यह पुस्तक न केवल बालसाहित्य की श्रेष्ठ कृतियों का परिचय कराती है, बल्कि पाठकों, अभिभावकों और शिक्षकों को सही पुस्तक चयन की दिशा भी दिखाती है।
श्री राजकुमार जैन राजन
बचपन मानव जीवन का वह स्वर्णिम काल है, जिसमें अर्जित संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं। किंतु वैश्वीकरण और आधुनिक जीवनशैली के कारण संयुक्त परिवारों का विघटन, माता-पिता की व्यस्तता और तकनीकी उपकरणों का बढ़ता प्रभाव बच्चों के प्राकृतिक बचपन को प्रभावित कर रहा है। माँ की लोरियाँ, नानी-दादी की कहानियाँ और दादाजी की पहेलियाँ अब लुप्त होती हुई धीरे-धीरे स्मृतियों में सिमटती जा रही हैं। ऐसे समय में बालसाहित्य बच्चों के संस्कार, ज्ञान, मनोरंजन और कल्पनाशीलता के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर सामने आता है।
पुस्तकें सार्वकालिक हैं। वास्तव में वे प्रकाश-स्तंभ हैं, जिनकी रोशनी में बच्चे जीवन की समस्याओं का समाधान खोजते हैं और अपने व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। इंटरनेट भले ही सूचनाओं का विशाल भंडार हो, किंतु पुस्तक से प्राप्त ज्ञान अधिक स्थायी और गहन होता है। इसलिए बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पुस्तकों का कोई विकल्प नहीं है। पुस्तकें ही बच्चों में तर्कशीलता, चिंतन मनन और कल्पनाशीलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
इस महत्व को देखते हुए यहां पर बालसाहित्य समीक्षा का महत्व बढ़ जाता है। आज बड़ी संख्या में बालसाहित्य लिखा और प्रकाशित हो रहा है, परंतु उसकी समीक्षा अपेक्षाकृत कम देखने को मिल रही है। इस अभाव को दूर करने का महत्वपूर्ण कार्य राजकुमार जैन ‘राजन’ ने किया है। उनकी यह पुस्तक वर्ष 2021 में प्रकाशित लगभग साठ श्रेष्ठ हिंदी बाल पुस्तकों की समीक्षाओं का संकलन है। यह संकलन बालसाहित्य की विविध विधाओं—कविता, गीत, कहानी, उपन्यास, विज्ञान साहित्य, हाइकु और एकांकी—को समेटते हुए एक समृद्ध गुलदस्ते का रूप ले रहा है।
इस पुस्तक की विशेषता इसकी संतुलित और सकारात्मक समीक्षा दृष्टि है। लेखक ने कृतियों के छिद्रान्वेषण के बजाय उनके गुणों को रेखांकित करते हुए बालोपयोगिता पर विशेष ध्यान दिया है। उनकी समीक्षा शैली अत्यंत सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित है। प्रत्येक समीक्षा में तीन प्रमुख आधार दिखाई देते हैं।
पहला आधार हैं संबंधित विधा का संक्षिप्त परिचय देना। दूसरा, कृतिकार के साहित्यिक व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए उसकी रचनाधार्मिता को सामने लाना है। तीसरा आधार है, कृति का समग्र मूल्यांकन करना। इसी पद्धति के आधार पर इन्होंने पुस्तक का मूल्यांकन किया है। इस पद्धति के कारण पाठकों को न केवल पुस्तक के विषय-वस्तु की जानकारी मिलती है, बल्कि उस साहित्यिक परंपरा और रचनाकार की दृष्टि को भी समझने का अवसर मिलता है।
पुस्तक में अनेक उल्लेखनीय कृतियों की समीक्षाएँ सम्मिलित हैं। जैसे “बिल्ली पढ़े किताब”, “अटकूँ-मटकूँ”, “मछुवारा का बेटा”, “जंगल का रहस्य”, “अंतरिक्ष में डायनासोर”, “इंद्र धनुष” तथा “विटामिनों से मुलाकात” आदि की समीक्षाएं सम्मिलित है। इन कृतियों के माध्यम से बच्चों के लिए मनोरंजन, ज्ञान, विज्ञान, नैतिक मूल्यों और कल्पनाशीलता का सुंदर समन्वय सामने आया है।
उसकी भूमिका लिखते हुए वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उषा यादव और डॉ. नागेश पांडेय ‘संजय’ ने भी इस कृति को अत्यंत महत्वपूर्ण और उपयोगी बताया है। उनका मत है कि यह पुस्तक भविष्य में हिंदी बालसाहित्य के इतिहास लेखन में भी सहायक सिद्ध होगी। वास्तव में यह कृति अभिभावकों, शिक्षकों, शोधार्थियों, संपादकों और बालसाहित्य प्रेमियों आदि सभी के लिए उपयोगी होकर उनके लिए मार्गदर्शक का कार्य करेगी। ऐसी आशा की जा सकती है।
निष्कर्ष रूप में कह सकते हैं कि राजकुमार जैन ‘राजन’ की यह पुस्तक हिंदी बालसाहित्य की गुणवत्ता और व्यापकता को सिद्ध करती है। यह कृति बताती है कि हिंदी में आज भी उत्कृष्ट बालसाहित्य लिखा जा रहा है, आवश्यकता केवल उसे पहचानने और पाठकों तक पहुँचाने की है। अपने समर्पण, परिश्रम और निष्पक्ष दृष्टि के माध्यम से लेखक ने बालसाहित्य समीक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही इस पुस्तक में अलका जैन आराधना की भी पुस्तकों की समीक्षाएं सम्मिलित की गई है। उनका योगदान भी उल्लेखनीय है।
यह पुस्तक न केवल जानकारी प्रदान करती है, बल्कि बालसाहित्य के प्रति नई जागरूकता भी उत्पन्न करती है। निश्चित ही वर्ष 2021 का हिंदी बाल साहित्य : एक आकलन हिंदी बालसाहित्य की परख और पहचान का एक महत्त्वपूर्ण दस्तावेज़ सिद्ध होगी। इसके लिए लेखक को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ।
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© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
16-07-2024
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