श्री संतोष नेमा “संतोष”
(आदरणीय श्री संतोष नेमा जी कवितायें, व्यंग्य, गजल, दोहे, मुक्तक आदि विधाओं के सशक्त हस्ताक्षर हैं. धार्मिक एवं सामाजिक संस्कार आपको विरासत में मिले हैं. आपके पिताजी स्वर्गीय देवी चरण नेमा जी ने कई भजन और आरतियाँ लिखीं थीं, जिनका प्रकाशन भी हुआ है. आप डाक विभाग से सेवानिवृत्त हैं. आपकी रचनाएँ राष्ट्रीय पत्र पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होती रहती हैं। आप कई सम्मानों / पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत हैं. “साप्ताहिक स्तम्भ – इंद्रधनुष” की अगली कड़ी में आज प्रस्तुत है समसामयिक विषय पर आपकी एक – कविता – यह कैसी तकरार लड़ाई… । आप श्री संतोष नेमा जी की रचनाएँ प्रत्येक शुक्रवार आत्मसात कर सकते हैं।)
☆ साहित्यिक स्तम्भ – इंद्रधनुष # २९८ ☆
☆ कविता – यह कैसी तकरार लड़ाई… ☆ श्री संतोष नेमा ☆
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यह कैसी तकरार लड़ाई
बात किसी को समझ न आई ।।
दादागीरी की ज़िद देखो ।
अमरीका ने आग लगाई ।।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
यह कैसा कानून कायदा ।
देखें अपना सिर्फ फायदा ।।
यूएन ओ धृतराष्ट्र बना है।
दिखे ना उसको कहीं आपदा ।।
आज समय लेता अंगड़ाई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
यूक्रेन को धमकाता रसिया ।
यूएसए की चालें घटिया ।।
रखते बड़ी नाक मतवाले ।
कातिल चाल चलें नटखटिया ।।
केवल अपनी दिखे भलाई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
पाक बड़ा नालायक लगता ।
जिसका खाता उसको ठगता ।।
हमला करता अफगानों पर ।
बारूदों से स्वयं सुलगता ।।
बढ़ा रहा आतंक कसाई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
किम जोंगुन की बात निराली ।
करे नित्य आघात मवाली ।।
सनक मिजाजी उसकी शातिर।
निंदनीय है न्याय प्रणाली ।।
मिसाइलें उसने चलवाई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
भले देश छोट इजरायल ।
है अमेरिका उसका कायल ।
कैसी जंग छिड़ी है भाई ।
कदम कदम मानवता घायल ।।
समझ गई दुनिया कुटिलाई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
खेल तेल का हर दिन चलता ।
मन में खोट इरादा पलता ।।
दबा रहे दीगर देशों को ।
यह संतोष खेल अब खलता ।।
जगजाहिर इनकी चतुराई ।
यह कैसी तकरार लड़ाई ।
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© संतोष कुमार नेमा “संतोष”
वरिष्ठ लेखक एवं साहित्यकार
आलोकनगर, जबलपुर (म. प्र.) मो 7000361983, 9300101799
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





