श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी के साप्ताहिक स्तम्भ “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी समसामयिक कविता “विश्व प्रेम आराधना… ”। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।
मनोज साहित्य # २१७ – विश्व प्रेम आराधना… ☆
(समसामयिक रचना)
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जग डूबा अवसाद में, छेड़ा जबसे युद्ध।
दोनों को समझा सकें, कहाँ से लाऊँ बुद्ध।।
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विश्व प्रेम आराधना, सुख शांति प्रासाद।
हिल -मिलकर सब रह सकें, हटे दूर उन्माद।।
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गीता के प्रतिसाद में, कर्म भाव ही तत्व।
जिसने जीवन को जिया, उसका बढ़ा महत्व।।
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जीव जगत को है मिला, आशीर्वाद प्रसाद।
नेक राह पर चल पड़ो, कभी न हो उन्माद।।
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© मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”
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