डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के मुक्तक – मन।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३१७ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के मुक्तक – मन ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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तुम आए हो यहाँ पर तो बड़ा मौसम सुहाना है।
मुझे तो आज लगता है पुरवाई तो बहाना है।
तेरी बातों को मैं तो तेरे नयनों से पढ़ती हूँ।
मुझे तो लगता है अब तो तुझे बस बातें घुमाना हैं।
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तेरी बातों से समझा है तेरा आना बहाना है।
मुझे तुम प्यार से देखो यही तेरा बहलाना है।
तू आया है मनाने मुझको चाहत में मेरी तो
नहीं समझी तेरी बातें ये तो मन को लुभाना है।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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