सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीत – नवनिर्माण…।
रचना संसार # ८९ – गीत – नवनिर्माण… ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
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बीती बातें भूले हम सब,
आओ नवनिर्माण करें।
नवल रचें इतिहास पुनः अब ,
जन-जन का कल्याण करें।।
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रहे मीत सच्चाई के हम ,
झूठों से मुख मोड़ चलें।
निश्छलता हो प्रेम सुधा रस ,
भेद-भाव को छोड़ चलें।।
सबक सिखा कर जयचंदो को,
हर दुख का परित्राण करें।
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बने तिरंगे के हम रक्षक,
शत्रु भाव का अंत रहे।
शीश झुका दे हर रिपु का हम,
हर ऋतु देख वसंत रहे।।
देश भक्ति की रहे भावना,
न्योछावर हम प्राण करें।
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नैतिकता की राह चलें हम,
भौतिकता का त्याग रहे।
मानवता की कर लें सेवा,
दुखियों से अनुराग रहे।।
अंतस बीज प्रेम के बोएँ,
पाठन वेद -पुराण करें।
*
राम -राज्य धरती पर लाएँ,
अपनों का विश्वास बनें।
तोड़ बेड़ियाँ अब सारी हम,
भारत माँ की आस बनें ।।
रूढिवाद को दूर भगाकर,
हम कुरीति निर्वाण करें।
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© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’
(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)
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