सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीतमन की सरिता

? रचना संसार # ९४ – गीत – मन की सरिता…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

काली छाया देख तिमिर की,

तन जलता ही चला गया।

मन की सरिता को पीड़ा का

जल खलता ही चला गया।।

*

व्यथित  रहा है जीवन सारा ,

थी उधार की तो साँसें।

शूल हृदय में चुभे हुए थे,

चुभी गले में थीं फाँसें।।

उलझन में था जीवन मेरा,

भ्रम पलता ही चला गया।

*

विरह व्यथा से व्याकुल अंतस ,

बरखा बरसे आँखों से।

निष्ठुर काल हमेशा कुचला,

झरती कलियाँ शाखों से।।

जर्जर तन अरु आहत मन था,

अरि छलता ही चला गया।

*

 रहा अनसुना क्रन्दन मेरा,

 तम का घेरा गहरा है।

 साँस- साँस पर विपदाओं का,

 लगा रात दिन पहरा है।।

 लिए हौसलों  की पतवारें,

 मैं चलता ही चला गयाl

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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