स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी द्वारा रचित – “कविता – शिक्षा की महत्ता…” । हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।)
☆ काव्य धारा # २६९ ☆
☆ शिक्षा की महत्ता… ☆ स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ ☆
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शिक्षा ही देती इस जग में, सबको समुचित ज्ञान है
शिक्षा से ही संभव इस जीवन में हर कल्याण है।
शिक्षा के बिन अंधकार है, फीका हर व्यवहार है
शिक्षा से ही पाता मानव धन उन्नति सम्मान है ।।1।।
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सदा सुशिक्षित विनयशील का युग करता गुणगान है
अपने विद्वानों पर ही होता सबको अभिमान है।
दूर दूर इससे ही जाते शिक्षा पाने लोग हैं
सुख दुख में सब साथ निभाती विद्या मित्र समान है ।।2।।
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शिक्षा ही इस जग में सचमुच हर विकास का प्राण है
शिक्षा से ही संभव गहराई का अनुसंधान है।
शिक्षा सचमुच अक्षय धन है, शिक्षा सुख की खान है
शिक्षा बिन भटकाव बहुत हैं, मुश्किल निज अधिकार है ।।3।।
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सुलभ कामना पूर्ति मंत्र-शिक्षा पर केन्द्रित ध्यान है
ज्ञानवान ही कर सकता भावी का कुछ अनुमान है।
मिली न शिक्षा सही अगर तो पग-पग पर कठिनाई है
संकट की रक्षा करने को सही ज्ञान भगवान है ।।4।।
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शिक्षा बिन अंधा सा औ’ निर्बल जैसा इन्सान है
शिक्षा के प्रकाश से होती हर मुश्किल आसान है।
शिक्षा ने ही सुलभ कराई सुविधाएं विज्ञान कीं
शिक्षा से ही हुआ विश्व का चतुर्मुखी उत्थान है ।।5।।
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© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’
साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी भोपाल ४६२०२३
मो. 9425484452
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




