डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “कॉकरोच…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३३
कविता – कॉकरोच… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
=1=
फैले हैं कितने-कहाँ कॉकरोच पता कर
इनकी कहाँ तलक है एपरोच पता कर
= 2 =
मरे हुए पे रोते हैं, ज़िन्दा को रुलाते
कब मरा ज़मीर निःसंकोच पता कर
= 3 =
पेट्रोल गैस डीजल की किल्लतों से उफ़्फ़
सत्ता को कुछ आई क्या खरोंच पता कर
= 4 =
लीकेज़ किसने किया युवा पूछ रहा है
नीट से लड़ाई किसने चोंच पता कर
= 5 =
कौन कर रहा है अच्छे दिन के नाम पर
ये लूटमार-छीन-झपट-नोंच पता कर
= 6 =
क़िरदार जा टकराया एपस्टीन शिला से
तब भी तनिक न आई क्यों मोच पता कर
= 7 =
कंकाल ले बहन का पहुँचा बैंक में बंदा
क्यों ऐसा दाँव-पेंच किसकी सोच पता कर
= 8 =
ख़्वाहिश तो बादशाह की भी रहती अधूरी
सियासती लोचे में क्यूँ ये लोच पता कर
= 9 =
‘राजेश’ हर मशीनरी निढाल पड़ी है
कानून को किसने लिया दबोच पता कर
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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