श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # २०७ ☆
☆ मुक्तक ।। चार दिन की जिंदगानी बनाएं बेमिसाल कहानी ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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=1=
इस दुनिया के रैन -बसेरे में चार दिन रहना है।
जीत लो बस दिल सबका ही यही कहना है।।
तेरे कर्म तेरे मीठे बोल बस यही साथ जाएंगे।
मिले सबका संग-साथ यही जीवन का गहना है।।
=2=
बहुत कम समय मिलता बस साथ बिताने को।
मत गवां देना इसे बस तुम रूठने मनाने को।।
शिकवा शिकायत में ही यह वक्त न निकल जाए।
बस तैयार रहना हमेशा हर रिश्ता निभाने को।।
=3=
नजर के फेर में तुम नजारों को मत गवां देना।
खो कर यकीन तुम सहारों को मत गवां देना।।
उठो ऊपर कितना भी जुड़े रहना जमीन के साथ।
भगा कर तेज नाव किनारों को मत गवां देना।।
=4=
जीवन प्रतिध्वनि सा लौटकरआती आवाज वही है।
अच्छा बुरा झूठ सच करना हमेशा अच्छी बात नहीं है।।
जैसा दोगे वैसा पाओगे यही नियम है सृष्टि का।
सुखी सफल जीवन का बस एक जवाब यही है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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