श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ३४ ☆

☆ कविता ☆ ~ हमारे बाबूजी ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ l

कविता, लिखता, कविता पढ़ता , कविता में इसे सजाता हूँll

*

माना माँ का स्थान बड़ा,               माँ जन्माती, दुलराती है l

गा गा कर लोरी सुना सुना,          थपकी दे हमें सुलाती है ll

*

एक बात ह्रदय से कहता हुँ, तेरा बेटा हूँ, यह कह इतराता हूँl

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

आँखों में प्यार उमड़ता है,          ममता हॅसती इतराती है l

मेरी हर हरकत सह करके,     माँ मुझ पर प्यार लुटाती है ll

*

गोदी माँ की फूलों सी है,       पर अंगुली पिता की धरता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

इस तारे को सूर्य बनाने में,     जीवन को खपा दिया तुमने l

हे पिता पसीना बहा बहा,      एक सागर बना दिया तुमने ll

*

तेरे  इस बड़े समुन्दर में,       जीवन जलयान चलाता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

है याद मुझे वह सुन्दर पल,   उस भाप के  इंजन की गाडी l

हर प्रश्नों का उत्तर पूछूँ, तुझको सहलाकर, खुजलाकर दाढ़ी ll

*

मेरे हर प्रश्नों के उत्तर थे,        इसके संग धाक जमाता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

मेरे भविष्य की चिंता को,           तेरा ललाट बतलाता था l

हर ख़ुशी और गम का खांका,    तेरे माथे खींच जाता था ll

*

अपनी इस सुघर हवेली का,      तुमको आधार बताता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

तुम देव लोक को चले गए, एक भव्य लोक को बना दिया l

 क्यारी में जल दे दे करके,    फूल अनोखा खिला दिया ll

*

सच पिता बड़ी छतरी होता,    जिसके नीचे छिप जाता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल  बनाता हूँ ll

*

सम्मान पिता का करता जो,  सम्मान जगत में पाता है l

आदर्श पुत्र कहलाता है,    वह सबके दिल को भाता  है ll

*

अपनी इस छोटी रचना का,    इसे सार तत्व बतलाता हूँ l

बाबूजी आपकी यादों का, एक सुन्दर सा महल बनाता हूँ ll

♥♥♥♥

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments