श्री प्रदीप शर्मा
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री प्रदीप शर्मा जी द्वारा हमारे प्रबुद्ध पाठकों के लिए दैनिक स्तम्भ “अभी अभी” के लिए आभार।आप प्रतिदिन इस स्तम्भ के अंतर्गत श्री प्रदीप शर्मा जी के चर्चित आलेख पढ़ सकेंगे। आज प्रस्तुत है आपका आलेख – “स्टॉप वॉच…“।)
अभी अभी # १०८९ ⇒ आलेख – स्टॉप वॉच
श्री प्रदीप शर्मा
समय रुकता नहीं, कभी किसी के लिए ठहरता नहीं! घड़ी रुक सकती है, ठहर सकती है, खराब हो सकती है। जो घड़ी रुक सकती है, उसे स्टॉप वॉच कहते हैं। आप घड़ी को रोक सकते हो, जब तक चाहो, उसे रोके रख भी सकते हो, क्योंकि वह सिर्फ घड़ी है, समय नहीं।
आपके पास आज समय है, घड़ी भी है, और आपकी घड़ी में स्टॉप वॉच भी है। अगर आपका मोबाइल बोलता होता तो शायद यही कहता, मैं ही समय हूँ, मैं ही घड़ी और मैं ही कैमरा। मैं ही कलयुग का संजय हूँ, महाभारत का ही नहीं, पूरे विश्व का आँखों देखा हाल आप तक पहुंचाने की दिव्य-दृष्टि मुझे प्राप्त है।।
दौड़ते समय को रुकते हुए देखना कैसा लगता है! सुबह सवेरे जब मैं साँसों का हिसाब रखता हूँ, तो स्टॉप वॉच मेरी साँसों की निगरानी करती है। मैं अपनी मर्ज़ी से स्टॉप वॉच शुरू करता हूँ, अपनी मर्ज़ी से ही उसे रोक भी सकता हूँ। कुछ सेकंड के लिए साँस रोककर, मैं यह खुशफहमी पाल लिया करता हूँ, कि मैंने इतने समय तक, समय को रोक लिया। साँस को रोका नहीं जाता, थामा जाता है। साँस है तो जिंदगी है। घड़ी की सुई मेरी साँसों का आना जाना देखती रहती है। कुछ मिनिट का योगासन करने में स्टॉप वॉच मुझे सहयोग करती है। प्राण ही समय है, साँसों का चलना ही ज़िन्दगी है। कुछ समय के लिए साँसों को थामिए, और देखिए! स्टॉप एंड वॉच।
साँसों का ठहराव ही समय का ठहराव है। गिनती की साँसें लेकर हम इस संसार में आए हैं, और गिनती के ही पल। जल्दी खर्च करें, या आराम से। स्वास्थ्य ही वह धन है, जिस पर नोटबन्दी का असर नहीं होता, सीबीआई का छापा नहीं पड़ता।।
वॉच को हम घड़ी भी कहते हैं! ज़िन्दगी की न बीते घड़ी। वॉच का एक अर्थ निगरानी भी होता है। एक वॉचमैन होता है जो पी एम भी हो सकता है और एक वॉच होती है, जिसमें am और pm दोनों होते हैं। वॉच-मेकर कभी घड़ी सुधारा करता था। घड़ी भी एक तरह का साज ही तो है। शायद इसीलिए वॉच-मेकर को घड़ीसाज भी कहते हैं। एक घड़ीसाज ने तो अपनी दुकान का नाम ही, समाज सुधारक की तर्ज पर, घड़ी-सुधारक रख लिया था।
स्टॉप वॉच की तरह अपने समय पर हमें ही निगरानी रखनी पड़ेगी। जिसे हम पल कहते हैं, वह कीमती है! बेशकीमती घड़ियाँ क्या कीमती समय बताया करती हैं ? ज़िन्दगी की रेस 100 मीटर भी हो सकती है, और 1000 मीटर भी। यह वह मैराथन है, जिसमें वक्त ठहरता नहीं। रेडी, स्टेडी एंड गो के साथ ज़िन्दगी की दौड़ शुरू होती है। हर कोई आगे भी निकलना चाहता है, प्रथम भी आना चाहता है, लेकिन दौड़ से कभी बाहर नहीं होना चाहता। स्टॉप वॉच स्टॉप होती है, और आपका स्टॉप आ जाता है।
घड़ी को रुकने न दें, लंबी रेस का घोड़ा है इंसान, कभी थकता नहीं, थमता नही।।
Don’t stop!
Wait and watch the
Stop Watch!!!
© श्री प्रदीप शर्मा
संपर्क – १०१, साहिल रिजेंसी, रोबोट स्क्वायर, MR 9, इंदौर
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