श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – दिखावा।)
☆ लघुकथा # १०८ – दिखावा ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
डी जे की धुन पर कुछ लोग नाच गा रहे थे और कुछ लोग कुछ लजीज व्यंजनों का आनंद ले रहे थे।
नवरात्रि का पहला दिन था, पास में माता का पंडाल भी लगा हुआ था। अचानक बहुत सारे लोग उसे पंडाल में आ गए और डांस फ्लोर पर डांस करने वालों की संख्या इतनी बढ़ गई कि ज्यादातर लोग नीचे ही थिरकने लगे। एक तरफ पटाखे चलने लगे।
वहाँ काम करने वाले दो किशोरवय लड़के आपस में बात करने लगे।
एक ने कहा “नए साल के आने पर इतनी खुशी की क्या बात है? मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की है। नया साल हो या नवरात्रि, हमें तो रोज यही साफ सफाई का काम करना है। अच्छा है, हमें काम मिल जाता है।”
दूसरे लड़के ने जवाब दिया- “बड़ी पार्टी है, इनका शहर में बहुत बड़ा शोरूम है, देर तक काम करेंगे, तो मालिक से कुछ पैसे ज्यादा मांग लेंगे, हमारे लिए तो यही खुशी की बात हो जाएगी।”
तभी अचानक पटाखे की आवाज से पास खड़ी एक बुजुर्ग महिला के हाथ से एक कांच का ग्लास टूट जाता है। डांस करते हुए सभी लोग एक दूसरे के ऊपर गिर जाते हैं कुछ को कांच लग जाते हैं, भाग दौड़ मच जाती है, लोग इधर-उधर भागने लगते हैं।
वे दोनों लड़के कहते हैं चलो मित्र तुम सब्जी उठा लो और मैं पूड़ी यह दोनों बड़े पतीले उठा कर घर चलते हैं पैसे तो नहीं मिलेंगे।
हम दोनों के परिवार के लोग मिलकर नव वर्ष मनाएंगे।
घर चलकर आरती करके माँ दुर्गा की आराधना करेंगे।
बड़े लोग ऐसे ही नव वर्ष मनाते हैं इसीलिए यह हुआ है?
दूसरे ने कहा दोस्त ठीक बोल रहे हो सच्चे दिल से मन की प्रार्थना करनी चाहिए दिखावे में यही हाल होता है।
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






