डॉ राजकुमार तिवारी ‘सुमित्र’

(संस्कारधानी  जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी  को सादर चरण स्पर्श । वे आज भी  हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते हैं। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया।  वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणा स्त्रोत हैं। आज प्रस्तुत हैं आपकी एक भावप्रवण रचना – जोड़ लिया है कैसा नाता…।)

✍  साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # 137 – जोड़ लिया है कैसा नाता…  ✍

जोड़ लिया है कैसा जाता

इधर उधर जब हो जाती तो

जाने कैसा मन घबराता।

जनम जनम के प्यासे मन को

पनघट का आधार मिला

जिसे सदा दुत्कार मिली हो

उसको गहरा प्यार मिला

क्या जानूँ तुम किन जन्मों की

पत्नी, प्रेयसी या माता।

सुबह शाम या सोते जगते

नयनों में छवि उतराती

तुम जीवन की चटक चाँदनी

हो मेरी पुण्य प्रभाती।

शक्ति भक्ति आसक्ति तुम्हीं हो

नींद तुम्हीं तुम जगराता।

© डॉ राजकुमार “सुमित्र”

112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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