स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है, आपके काव्य संग्रह ‘शब्द नहीं रहे शब्द‘ की एक भावप्रवण कविता – प्रतिष्ठा के नाम पर…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २६१ – प्रतिष्ठा के नाम पर
(काव्य संग्रह – शब्द नहीं रहे शब्द से )
आयोजित होते हैं कार्यक्रम
लम्बी रकम देकर बुलाये जाते हैं
बाहर से लोग।
जब वे नहीं आ पाते
या कम आते हैं
तब नगर की प्रतिष्ठा का वास्ता देकर
फोकट में बुलाये जाते हैं नगर के लोग
जैसे
बाहरी लोगों को टिकिट देकर
की जाती है उन्हें जिताने की अपील
नगर की प्रतिष्ठा के नाम पर
सोचता हूँ
प्रतिष्ठा भी क्या चीज है
किसी के लिए अंडर गारमेन्ट
किसी के लिये
उतरी हुई कमीज है।
कुछ भी हो
प्रतिष्ठा बड़ी चीज है।
© डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈








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