आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – विश्व हिंदी दिवस विशेष – हिंदी आरती।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २६२ ☆
☆ विश्व हिंदी दिवस विशेष – हिंदी आरती ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆
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भारती भाषा प्यारी की।
आरती हिन्दी न्यारी की…
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‘लोक‘ की भाषा है हिंदी,
‘तंत्र‘ की आशा है हिंदी।
करोड़ों जिव्हाओं-आसीन
न कोई सकता इसको छीन।
ब्रम्ह की, विष्णु-पुरारी की
आरती हिन्दी न्यारी की।।
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वाक्-ध्वनि हिंदी का आधार,
पाँच वर्गों बाँटे उच्चार।
बोलते जो वह लिखते आप-
वर्तनी स्वर-व्यंजन अनुसार।
नागरी लिपि सुविचारी की
आरती हिंदी न्यारी की।।
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एकता पर हिंदी बलिहार,
लिंग दो वचन क्रिया व्यापार।
संधियाँ काल शक्ति हैं तीन-
विशेषण हैं हिंदी में चार।
पाँच अव्यय व्यवहारी की
आरती हिंदी न्यारी की।।
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वर्ण हिंदी के अति सोहें,
शब्द मानव मन को मोहें।
काव्य रचना सुडौल सुन्दर
वाक्य लेते सबका मन हर।
छंद-सुमनों की क्यारी की
आरती हिंदी न्यारी की।।
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समेटे ज्ञान-नीति-विज्ञान,
सीख-पढ़-लिख हों हम विद्वान।
विषय जो कठिन जटिल नीरस-
बना देती हिंदी रसवान।
विश्ववाणी गुणकारी की
आरती हिंदी न्यारी की।।
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© आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
१९.११.२०२५
संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,
चलभाष: ९४२५१८३२४४ ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





