श्रीमती शशि सराफ

(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता मैं, तेरी सखी।)

☆ शशि साहित्य # १० ☆

? कविता – मैं, तेरी सखी…  ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ  ? ?

मैं बैठी, निपट अकेली,

भारी मन और सजल नयन..

मीठी मधुर, एक आवाज आई,

कैसी हो तुम, प्रिय सखी..

 

पहले मुझसे सुन लो तुम,

मेरा परिचय प्रिय सखी,

 

दुनिया कहती, सिर्फ कान है मेरे,

प्यार भरा दिल भी रखती हूं.. प्रिय सखी,

 

तेरा मन बहलाने को,

दर्द टूटने का भी सह लूंगी..

एक झरोखा बना मुझ में,

और बाहर की दुनिया को देख,

चहकना चिड़ियों का देख,

फूलों का खिलना देख,

सूरज, चंदा का उगना, और फिर ढ़लना देख..

बना ले मुझको अपना चित्र पटल..

और सारी भावनाएं उकेर दे..

ना समझ, खुद को कैद में मेरी,

दुनिया की खुदगर्जी से,

बचा रखा है, अपने आगोश में..

मैं हूं तेरी हमदर्द सखी,

मुझको अपना मान सखी…

© श्रीमती शशि सराफ

जबलपुर, मध्यप्रदेश 

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted