श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशि सुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘राधा कृष्ण प्रीत…‘।)
☆ शशि साहित्य # १२ ☆
कविता – राधा कृष्ण प्रीत… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
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कृष्ण तुम मीत हो,
राधा तुम प्रीत हो,
जग में चहुं ओर,
फिर प्रेम की रीत हो,
निस्वार्थ भाव की,
जीत ही जीत हो,,
बज उठे मधुर तरंग,
प्रेम भरे गीत हों,,
दूरी भी कोई ना,
दिल को प्रतीत हो,,
सारे भाव ही अंतस,
से पूर्ण समर्पित हो,,
तुम मे मैं, और मुझमें ,
तुम परावर्तित हो,,
मन के प्रेम मंदिर में,
मूरत तुम्हारी प्रतिष्ठित हो,,
हर क्षण में सम्मिलित तुम,
ऐसा समय व्यतीत हो,,
कृष्ण तुम मीत हो,
संग राधा की प्रीत हो…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






