स्व. डॉ. राजकुमार तिवारी “सुमित्र”
(संस्कारधानी जबलपुर के हमारी वरिष्ठतम पीढ़ी के साहित्यकार गुरुवर डॉ. राजकुमार “सुमित्र” जी को सादर चरण स्पर्श । वे सदैव हमारी उंगलियां थामकर अपने अनुभव की विरासत हमसे समय-समय पर साझा करते रहते थे। इस पीढ़ी ने अपना सारा जीवन साहित्य सेवा में अर्पित कर दिया। वे निश्चित ही हमारे आदर्श हैं और प्रेरणास्रोत हैं। आज प्रस्तुत है – सुमित्र के दोहे…।)
साप्ताहिक स्तम्भ – लेखनी सुमित्र की # २७५ – सुमित्र के दोहे
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रोई ब्रज की गोपिका, रो रहे नंदलाल।
चुप्पी साधे राधिका, आंसू करे सवाल।
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आंसू का इतिहास है आशु का भूगोल ।
आंसू का विज्ञान अब, रहस्य रहा है खोल।।
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आंसू है संवेदना आंसू, मन की पीर।
यशोधरा का रूप है, जसोदा की जंजीर।।
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जनक दुलारी चल पड़ी, ओढ़ अश्रु का चीर ।
आंसू डूबी अयोध्या, राम मौन गंभीर ।।
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घनानंद का अश्रुधन, अर्पित कृष्ण सुजान।
उसी अश्रु की धार में, डूबे थे रसखान ।।
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आंसू डूबी सांस से, रचित ईश्वरी फाग।
रजउ ब्रह्म थी, जीव थी, ऐसा था अनुराग।।
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© डॉ. राजकुमार “सुमित्र”
साभार : डॉ भावना शुक्ल
112 सर्राफा वार्ड, सिटी कोतवाली के पीछे चुन्नीलाल का बाड़ा, जबलपुर, मध्य प्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






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