श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
(संस्कारधानी जबलपुर की श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’ जी की लघुकथाओं, कविता /गीत का अपना संसार है। साप्ताहिक स्तम्भ – श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य शृंखला में आज प्रस्तुत है सामाजिक विमर्श पर आधारित विचारणीय लघुकथा “मापनी”।)
☆ श्रीमति सिद्धेश्वरी जी का साहित्य # २६५ ☆
🌻लघु कथा🌻 मापनी 🌻
वैशाली एक साहित्य साधना में लीन महिला है। गृहणी के साथ ही साथ सभी की सेवा श्रद्धा भावना से करती है।
सृजन करते समय सभी तुकांत पदांत मापनी और विधा का ध्यान रखती है।
सदैव की भांति आज वह फिर अपनी ही खास सखी से छली गई क्योंकि उसे चाटुकारिता, चापलूसी की मापनी, विधा नही आती।
कब दीर्घ लघु बन जाता है और कब दो लघु दीर्घ बन जाते हैं। ये मापनी उसने दोस्ती, संबंधों में शायद नही सीख पाई थी।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



