श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १८६ ☆
☆ देश-परदेश – दाग अच्छे हैं ☆ श्री राकेश कुमार ☆
कुछ वर्षों पूर्व हिंदुस्तान लीवर लिमिट, ने अपने सबसे अधिक बिकने वाले सर्फ डिटर्जेंट पाउडर के लिए “दाग़ अच्छे हैं” को अपनी टैग लाइन बना कर अपने उत्पाद की बिक्री को एक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया था।
आज के समाचार पत्र की उपरोक्त खबर पढ़ कर तो सर्फ कंपनी के निर्माताओं की तो नींद उड़ गई होगी। जब रेलवे ए.आई. के उपयोग से दाग ढूंढ लेगा, तो सर्फ जैसे पाउडर की क्या आवश्यकता आन पड़ी है। खबर पढ़ कर हमारे घर में भी ये निर्णय लिया गया अब तो ए.आई. का उपयोग कर कपड़े धोये जाएंगे।
रेलवे जैसे बड़े संस्थानों में वर्षों पूर्व में स्टेशन के पास स्थित किसी बड़े तालाब में कपड़े धो कर, खुले में सुखाये जाते थे। इस प्रकार के स्थानों को धोबी घाट कहते हैं। अब ये तरीका बदल चुका है। इसलिए इन घाटों को भी “पुराना धोबी घाट” कहा जाता है। हमने तो पुरानी फिल्मों में गुंडो द्वारा अगवा किए हीरो/ हीरोइन को ऐसे स्थानों पर छुपा कर रखते हुए देखा था।
गधे के ऊपर लदे हुए कपड़े या धोबी के साथ किसी कुत्ते को भी नहीं देखा हैं। पता नहीं फिर कहावत “धोबी का कुत्ता घर का ना घाट” कैसे बन गई ?
इस ख़बर को पढ़ कर बर्तन साफ करने वाले पाउडर निर्माताओं और उन पाउडरों के ब्रांड एम्बेसडर हमारी फिल्मी दुनिया के हीरो भी बहुत परेशान हैं। उनको डर है, कि अब गन्दी कढ़ाई ( बर्तन) के जिद्दी दाग भी ए. आई. से दूर हो जाएंगे, तो उसके विज्ञापन से होने वाली आय समाप्त हो जाएगी। इन पाउडर निर्माताओं के विज्ञापन में नींबू के रस का प्रयोग भी किया जाता है, ऐसा क्लैम किया जाता है, यदि ये वास्तकविकता है, तो बाज़ार में नींबू भी सस्ते हो जायेंगें, क्योंकि ए. आई. के उपयोग में किसी भी पदार्थ का उपयोग जो नहीं होता हैं।
हमारे फिल्मी हीरो बहुत दूरगामी होते हैं, इसलिए उन्होंने अब खाने में उपयोग होने वाले मसालों और पशु आहार जैसे नए आइटम के विज्ञापनों से अपनी आय में बढ़ोतरी कर ली है।
आपकी जानकारी के लिए पता देवें, कि आज का ये आलेख भी ए. आई. ने ही लिखा है।
© श्री राकेश कुमार
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