श्री अरुण कुमार दुबे

(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “सदाक़त का न छोड़ो साथ यारो“)

☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १२६ ☆

✍ सदाक़त का न छोड़ो साथ यारो… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे 

जो बोले आपका सानी नही है

समझ लो शख़्स बेमानी नही है

न भूँखा नंगा हो दुनिया में कोई

सहर ऐसी कभी आनी नहीं है

 *

बनेंगे बे-बज़ह दुश्मन हजारों

मधुर गर आपकी वाणी नहीं है

 *

हवस दौलत की कब मिटती है उनकी

समझते दुनिया जो फ़ानी नहीं है

 *

बचा लो ज़िंदगी को फिर न रहना

अगर पीने को जो पानी नहीं है

 *

जुटा कर चार गीदड़ शेर घेरो

ये कोशिश बोल बचकानी नहीं है

 *

मिले अवसर भुना लो अक्लमंदी

घटा मौके की फिर छानी नहीं है

 *

करो तालीम हासिल हो जहाँ से नहीं है

गँवाया वक़्त नादानी नहीं है

 *

बड़े बूढ़ों की सुन लो ध्यान देकर

कोई यूं बात समझानी नहीं है

 *

इसे मन की निगाहों से  निहारो

ख़ुदा की जात जिस्मानी नहीं है

 *

कई है रंग के ये गुल का गुच्छा

हयात अपनी परेशानी नहीं है

 *

दगा करना रहा फ़ितरत में उसकी

उसे कोई पशेमानी नहीं है

 *

हसीं कितनी वहाँ कुदरत अभी तक

जहाँ इंसां की निगरानी नहीं है

 *

सदाक़त का न छोड़ो साथ यारो

 भले ही इसमें आसानी नहीं है

 *

पका न सब्र का फल उम्र बीती

अरुण को सब्र अब खानी नहीं है

© श्री अरुण कुमार दुबे

सम्पर्क : 5, सिविल लाइन्स सागर मध्य प्रदेश

सिरThanks मोबाइल : 9425172009 Email : arunkdubeynidhi@gmail. com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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