श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “प्यार है हम कहा नहीं करते…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १३८ ☆
प्यार है हम कहा नहीं करते… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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शिकवे दिल में रखा नहीं करते
खातमा रब्त का नहीं करते
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प्यार है हम कहा नहीं करते
तुम ही चहरा पढा नहीं करते
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कोई रस्मन वफ़ा नहीं करते
दिल लगाकर दग़ा नही करते
*
जो नसीहत पे ध्यान देते हैं
ठोकरों से गिरा नहीं करते
*
हम गुमां पाल के न चुप बैठे
दिल मिले बिन खुला नहीं करते
*
मौत जब आना होगी आएगी
उसके डर से भरा नहीं करते
*
शमअ सा इश्क़ कर पिघलना क्यों
हम कभी रतजगा नहीं करते
*
पाप ही बस गिनाते रहते हो
छू के तुम पारसा नहीं करते
*
घाव भरता नहीं दिया उनका
हम ही इसकी दवा नहीं करते
*
मसअलों को मज़ाक समझें जो
उनसे हम मशविरा नहीं करते
*
पढ़के वन्नास वसवसों का बशर
जाने क्यूँ ख़ात्मा नहीं करते
*
हमने अब तक ख़ुशी नहीं देखी
ज़िन्दगी से गिला नहीं करते
*
अर्श को चूम गुमाँ जिनको अरुण
मुस्तकिल वो रहा नहीं करते
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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