श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “मरकर अमर वो हो गया…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १६६ ☆
मरकर अमर वो हो गया… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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पूछा तू उसके पास बुलाया न आ गया
बोला कि पलकें छपका इशारा किया गया
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फ़रियाद है ग़रीब की हर दर पे अनसुनी
रोता हुआ वो आया था रोता चला गया
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मरकर अमर वो हो गया सदियों के वास्ते
जो जान अपनी मुल्क की ख़ातिर लुटा गया
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धोखे से कब गिला तेरे मैं शुक्रिया करूँ
आँखों से ये जो यक़ीन का चश्मा हटा गया
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भागे है ज़र के पीछे बशर जानते हुए
ले साथ क्या वो आया है ले साथ क्या गया
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उम्मीद दर्द से थी मुदावा की जिससे वो
इक ज़ख़्म मेरे दिल पे है ताज़ा लगा गया
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अब आज़माने को कोई सूरत नहीं बची
तोड़ा है तुमने जब भी भरोसा किया गया
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वो तंगदिल था कर न सका है मुझे मुआफ़
वर्षों का रब्त एक ख़ता पर मिटा गया
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इल्ज़ामे-बेवफाई से मैं बच गया अरुण
मुझसे किनारा करके सनम बेवफा गया
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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