सुश्री राधिका बिष्ट
(स्वामी सत्यानंद सरस्वती की परंपरा में दीक्षित योग शिक्षिका। परमार्थ योग स्कूल ऋषिकेश और अय्यंगार हिमालयन योग केंद्र धर्मशाला में प्रशिक्षित। योग सत्र संचालन का 20 वर्षों का अनुभव।)
☆ बालिकाओं के लिए योग ☆ सुश्री राधिका बिष्ट ☆
बालिकाओं के लिए योग क्यों आवश्यक है? इससे उन्हें क्या लाभ मिलते हैं?
बालिकाओं के लिए योग बहुत लाभदायक है। यह शरीर को लचीला, मजबूत और सहनशील बनाता है। इससे ‘स्टैमिना’ और ‘बैलेंस’ में सुधार होता है जो कि शास्त्रीय नृत्य जैसी विधाओं के लिए सहायक हैं। योग से ‘फोकस’ और एकाग्रता बढ़ती है जिससे पढ़ाई में अधिक मन लगता है।
बालिकाओं की ‘हार्मोनल ग्रोथ’ को यह सुगम बनाता है क्योंकि योग से ग्रंथियां क्रियाशील होती हैं। इससे उनके मानसिक और ‘इमोशनल’ स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
योग से धमनियों में ऊर्जा का संचार होता है। अंतर्मन शुद्ध, शांत और आनंदमय होता है। जो बालिकाएं नियमित योग करती हैं, उन्हें तनाव और ‘डिप्रैशन’ होने की संभावना नगण्य हो जाती है।
बालिकाओं के सर्वांगीण विकास में योग अत्यंत सहायक है। तन-मन के संतुलन से आत्मविश्वास और आत्मिक बल बढ़ता है। इससे विषम परिस्थितियों से जूझने की क्षमता विकसित होती है।
योग से आत्म-संयम और आत्म-अनुशासन गहरा होता है। इससे सजगता या ‘माइंडफुलनेस’ का उदय होता है जो कि बालिकाओं के संपूर्ण और समग्र भविष्य की आधारशिला तैयार करते हैं।
© सुश्री राधिका बिष्ट
योग शिक्षिका
≈संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈






