श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – नसीहत।)
☆ लघुकथा # ९६ – नसीहत ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
रोशनी ने गुस्से में कहा- “अरे! तुम लोगों के घर मैं इसीलिए नहीं आती। तुम्हारे घर में उठने बैठने की भी जगह नहीं है।”
“दीदी – हर किसी को अपने मायके आना अच्छा लगता है। आप चिंता मत करो, आप मेरे कमरे में जाकर सो जाओ आराम से। शादी ब्याह के काम में तो थोड़ी सी देर हो ही जाती है।” रूबी ने अपनी ननद मीनाक्षी से कहा।
“बस बस मां को तो तुम अपने इशारे में नचाती रहती हो सारा दिन उनसे कुछ ना कुछ काम करवाती रहती हो और आप मुझे नसीहत दे रही हो।”
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





