श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “होली के रंग में…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २५४ ☆

☆ # “होली के रंग में…” # ☆

 

रंग-बिरंगी पिचकारी में

रंग-बिरंगे रंग है

पिचकारी के रंगों से

भीग रहे अंग अंग है

 

गली गली में हुड़दंग है

तरुणाई  तो उदंड है

रंग गुलाल लगा नाच रहे हैं

जोश इनमें प्रचंड है

 

सजनी की है कंचन काया

साजन ने है रंग लगाया

आरक्त हो गए गाल गुलाबी

निखर गई है सजनी की काया

 

दोनों रंगों में घुल गए हैं

दिन दुनिया को भूल गए हैं

डूबे हुए हैं फाग की मस्ती में

बाहों में एक दूजे के झूल गए

 

भांग खाओ या मिठाई

या पी जाओ खूब ठंडाई

भांग की मस्ती जब चढ़ती है

तो बस चढ़ती है जाती है भाई

 

खूब रंगों से खेलो होली

संग हो प्रीतम या हमजोली

अभद्र आचरण को त्याग कर

भाई बोलो प्रेम की बोली

 

रंगों से है रंगीन जवानी

रंग नहीं तो जीवन है फानी

रंग है जीवन का मर्म

रंग बिना अधूरी है कहानी

 

रंगों में डूब जाओ यारों

रंगों में सब भूल जाओ यारों

एक गुलाल का टीका लगाकर

सबको गले लगाओ यारों /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’  ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments