डॉ कुंदन सिंह परिहार

(वरिष्ठतम साहित्यकार आदरणीय  डॉ  कुन्दन सिंह परिहार जी  का साहित्य विशेषकर व्यंग्य  एवं  लघुकथाएं  ई-अभिव्यक्ति  के माध्यम से काफी  पढ़ी  एवं  सराही जाती रही हैं।   हम  प्रति रविवार  उनके साप्ताहिक स्तम्भ – “परिहार जी का साहित्यिक संसार” शीर्षक  के अंतर्गत उनकी चुनिन्दा रचनाएँ आप तक पहुंचाते  रहते हैं।  डॉ कुंदन सिंह परिहार जी  की रचनाओं के पात्र  हमें हमारे आसपास ही दिख जाते हैं। कुछ पात्र तो अक्सर हमारे आसपास या गली मोहल्ले में ही नज़र आ जाते हैं।  उन पात्रों की वाक्पटुता और उनके हावभाव को डॉ परिहार जी उन्हीं की बोलचाल  की भाषा का प्रयोग करते हुए अपना साहित्यिक संसार रच डालते हैं।आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम  व्यंग्य  – ‘बिल्ली और छींका’। इस अतिसुन्दर रचना के लिए डॉ परिहार जी की लेखनी को सादर नमन।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – परिहार जी का साहित्यिक संसार  # ३२९ ☆

☆ व्यंग्य ☆ बिल्ली और छींका

रौनक भाई को खुशी के मारे रात भर नींद नहीं आयी। रात भर भगवान को धन्यवाद देते रहे। रात को ग्यारह बजे तक बधाई के फोन आते रहे। बिल्ली के भाग्य से छींका टूटा है।

सवेरे छः बजे से ही फोन फिर बजने लगा। बधाइयों का तांता लग गया। फिर आठ बजे से पार्टी के लोग बधाई देने के लिए आने लगे। देखते देखते रौनक भाई का लॉन लोगों से भर गया। कुछ लोग मिठाई का डिब्बा लेकर आये थे।

दरअसल पिछली शाम रौनक भाई के विरोधी दल की एक चुनाव सभा हुई थी, जिसमें एक छुटभइये ने अपनी पार्टी के प्रति ख़ैरख्वाही दिखाने के चक्कर में रौनक भाई का नाम लेकर उन्हें ‘सुअर’ कह दिया था। तभी से राजनीतिक वातावरण गर्म हो गया था और रौनक भाई की पार्टी के लोग विरोधियों को नाना प्रकार के विशेषणों से नवाज़ने में लग गये थे।

रौनक भाई आपदा को अवसर में बदलने के पुराने खिलाड़ी थे। उन्होंने मौके को लपक लिया। तत्काल गालीबाज़ के सैकड़ों वीडियो वायरल हो गये। रौनक भाई का वीडियो भी वायरल हुआ जिसमें वे सन्त की मुद्रा में कह रहे थे कि  यह अपमान उनका नहीं, देश के एक  सौ चालीस करोड़ लोगों का है। जनता विरोधियों की इस बदज़बानी को कभी माफ नहीं करेगी और उसका जवाब वोट के मार्फत देगी।

पिछली शाम से रौनक भाई गद्गद थे। विरोधियों ने अचानक ही ‘सेल्फ गोल’ कर लिया था। रौनक भाई को पक्का भरोसा हो गया था कि इस गाली की बदौलत अगले चुनाव में उनके वोटों में कम से कम लाख डेढ़-लाख का इज़ाफा हो जाएगा। यह गाली विरोधियों को बहुत मंहगी पड़ेगी। उन्हें पता चला था कि विरोधियों में से कई अब पछता रहे थे, लेकिन अब पछताए होत का? तीर कमान से निकल चुका था।

रौनक भाई ने कई बार लॉन में इकट्ठी भीड़ को संबोधित किया। उन्होंने कहा, ‘कल भगवान ने हमें वरदान दिया है। यह गाली हमारे लिए वरदान ही साबित होने वाली है। गाली का हम कोई जवाब नहीं देंगे। जवाब जनता देगी। हम तो ‘जो तोकू कांटा बुवै, ताहि बोउ तू फूल’ वाले सिद्धांत पर चलेंगे। गाली का जवाब गाली में देने से सब गड़बड़ हो सकता है। सावधानी हटी, दुर्घटना घटी। हम तो कल से आन्दोलन करेंगे और जनता के दिमाग में ठोक ठोक कर भरेंगे कि हमें गाली दी गयी है, जिसे क्षमा नहीं किया जा सकता।

‘दूसरी बात यह कि भगवान का एक अवतार वराह अवतार है। इस तरह विरोधियों ने सुअर कह कर मुझे भगवान का अवतार बना दिया है। इसलिए मैं तो अपमानित से ज़्यादा सम्मानित महसूस कर रहा हूं। लेकिन मौके की नज़ाकत को देखते हुए आप लोग कल से सड़कों पर उतरें और जनता को बताएं कि हमारे विरोधी कितनी घटिया मानसिकता के लोग हैं। राजनीति में मौके का फायदा उठाने से चूकना बेवकूफी होती है। तो उठिए और काम पर लग जाइए। अब  एक मिनट भी ज़ाया करना गुनाह होगा।’

पार्टी के एक सयाने बोले, ‘गाली दी है तो मानहानि का दावा होना चाहिए।’

रौनक भाई ने जवाब दिया, ‘ज़रूर होगा, लेकिन पहले अच्छी तरह से ‘विक्टिम कार्ड’ खेलना ज़रूरी है। जनता के मन में हमारी ‘इंसल्ट’ की बात पैठनी चाहिए।’

© डॉ कुंदन सिंह परिहार

जबलपुर, मध्य प्रदेश

 संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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