श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # २०६ ☆
☆ ।। मुक्तक ।। बढ़ रहा तापमान, हो रहा पर्यावरण का नुकसान ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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= 1 =
नदी ताल में कम हो रहा जल हम
पानी यूँ बहाते जा रहे हैं।
ग्लेशियर पिघल रहे और समुन्द्र
तल यूँ बढ़ाते जा रहे हैं।।
काट कर सारे वन कंक्रीट के कई
जंगल बसा दिए विकास ने।
अनायस विनाश की ओर कदम
दुनिया के चलाते जा रहे हैं।।
= 2 =
पॉलीथिन के ढेर पर बैठकर हम
पॉलीथिन हटाओ नारा दे रहे हैं।
प्रक्रति का शोषण कर के सुनामी
भूकंप काअभिशाप ले रहे हैं।।
पर्यवरण प्रदूषित हो रहा दिन रात
आधुनिक संस्कृति के कारण।
भूस्खलन,भीषण गर्मी,ओलावृष्टि
नाव बदले में आज खे रहे हैं।।
= 3 =
ओज़ोन लेयर छेद,कार्बन उत्सर्जन
अंधाधुंध दोहन दुष्परिणाम है।
वृक्षों की कटाई बन गया आजकल
विकास प्रगति दूसरा नाम है।।
हरियाली समाप्त करने की बहुत
कीमत चुका रही है दुनिया।
इसी कारण ऋतुचक्र,वर्षा चक्र नित
असुंतलन आज आम है।।
= 4 =
सोचें क्या देकर जाएंगे हम अपनी
अगली पीढ़ी को विरासत में।
शुद्ध जल और वायु को ही कैद कर
दिया जीवन शैली हिरासत में।।
जानता नहीं कि आदमी कुल्हाड़ी
पेड़ पर नहीं पाँव पर चल रही।
प्रकृति ही नहीं संपूर्ण मानवता नष्ट हो
जाएगी दानवी हिफाज़त में।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
बरेली ईमेल – Skkapoor5067@ gmail.com, मोब – 9897071046, 8218685464






