सुश्री सविता खण्डेलवाल ‘भानु’
(लेखन-प्रकाशन – गत 2022 से छंद लेखन, एकल प्रकाशन– कलम के नवांकुर, अनुग्रह नवप्रस्तारित छंद पर लेखन (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), साझा संकलन – तकरीबन 10, द्वादश ज्योतिर्लिंग (लंदन बुक आफ रिकार्ड), अनेकता में एकता (एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड), छंदावली – (मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड), महाकाल साहित्य सम्मान से सम्मानित। आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता पर्यावरण!)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ सविता साहित्य # ५ ☆
☆ पर्यावरण ☆ सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु” ☆
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वृक्ष काटते निशदिन मानव, होगा क्या परिणाम रे।
शीतलता कह कहाँ मिलेगी, जब आएगी घाम रे।।
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खो जाएंँगे मौसम सारे, नहीं मिलेगी बूंँद रे।
जागो अब कब तक बैठोगे, ऐसे आंँखें मूंँद रे।।
निशिदिन जंँगल खाली होते, धरती करती शोक रे।
धानी चुनर फटती जाती, मानव इसको रोक रे।।
रौद्र रूप जब धारे माता, होगा क्या परिणाम रे।
शीतलता कह कहाँ मिलेगी, जब आएगी घाम रे।।
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पर्यावरण दिवस जब आए, आती सबको याद रे।
वृक्ष नीर हम लोग बचाएंँ, भूले इसके बाद रे।।
दिव्य संपदा का अति दोहन, होगा ये अभिशाप रे।
भारत माँ आवाज लगाती, बंद करो ये पाप रे।।
हरित क्रांति से वसुंधरा का, दृश्य बनें अभिराम रे।।
शीतलता कह कहाँ मिलेगी, जब आएगी घाम रे।।
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© सुश्री सविता खण्डेलवाल “भानु”
झालरापाटन राजस्थान
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





