डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “सलामी…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ कविता # ३३
कविता – सलामी… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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चापलूसों द्वारा ये गुलामी देखिये
डूबते सूरज को उफ़ सलामी देखिये
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जनता हलाकान है कोहराम हर तरफ़
चुनी हुई सरकार की नाकामी देखिये
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अच्छे दिनों की बात उनके भाषणों में है
परिणाम इसका आप दूरगामी देखिए
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कल के फटीचर जो आज कुर्सी पा गये
अब हुए करोड़ों के आसामी देखिये
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हो गये हरामी सभी नामी गिरामी
आगामी साजिशों पे उनकी हामी देखिए
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त्राहिमाम पानी पे मचा है देश में
पी रहा शरबत कोई बादामी देखिये
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‘राजेश’ नुक्ताचीनी बेवज़ह की छोड़िये
खूबियाँ औरों में, ख़ुद में ख़ामी देखिए
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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