श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का  हिन्दी बाल -साहित्य  एवं  हिन्दी साहित्य  की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी के हाइबन ”  के अंतर्गत उनकी मानवीय दृष्टिकोण से परिपूर्ण लघुकथाएं आप प्रत्येक गुरुवार को पढ़ सकते हैं।  आज प्रस्तुत है एक हाइबन   “बादल महल। )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी के हाइबन  # 63 ☆

☆ बादल महल ☆

बादल महल कुंभलगढ़ किले के शीर्ष पर स्थित एक खूबसूरत महल है । यह संपूर्ण महल दो खंडों में विभाजित हैं । किन्तु आपस में जुड़ा हुआ है। इस महल के एक और मर्दाना महल है।  दूसरी ओर जनाना महल निर्मित है। इसी माहौल में वातानुकूलित लाल पत्थर की जालिया लगी है। लाल पत्थर की जालियों की विशिष्ट बनावट के कारण गर्म हवा ठंडी होकर अंदर की ओर बहती है।

बादल महल बहुत ही ऊँचाई पर बना हुआ महल है । इस महल से जमीन बहुत गहराई में नजर आती है । ऐसा दिखता है मानो आप बादलों के बीच उड़ते हुए उड़न खटोले से जमीन को देख रहे हैं । इसी ऊंचाई और दृश्यता की वजह से इसका नाम बादल महल पड़ा है।

लाल झरोखा~

फर्श पर देखते

सूर्य के बिंब।

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© ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

पोस्ट ऑफिस के पास, रतनगढ़-४५८२२६ (नीमच) मप्र

ईमेल  – opkshatriya@gmail.com

मोबाइल – 9424079675

≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’/श्री जय प्रकाश पाण्डेय  ≈

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