मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

चाहे समंदर में कितने ही दूर चले जाओ,

साहिल पर लौटना ही पड़ता है ।

परिंदे भी कितनी ऊंची परवाज़ कर ले,

ज़मीन नशेमन पर वापस बुलाती है,

सृष्टि का शाश्वत नियम जो है।

 

कुदरत के निज़ाम की ख़िलाफ़त से,

हासिल का नतीजा ” सिफ़र ” होता है।

 

ज़मीन हक़ीक़तें ज़िंदगी जीना सिखाती हैं ,

और अंत में ज़मीन ही समूचे वजूद को ,

आगोश में ले लेती हैं।

 

आस्मां ऊंचा बहुत है

तब तक, जब तक, पांव, ज़मीन  न छोड़ें

और छूटे तो या बुलंदी मिलती है,

या बहुत कुछ खो जाता है, और..

कुछ भी मयस्सर नहीं होता…!!!!!

*

(कायनात=सृष्टि। कायदे= नियम। साहिल= किनारा/तट, नशेमन = घोंसला, घर, आश्रय। सिफ़र= शून्य। वजूद = अस्तित्व। परवाज़=उड़ान। निज़ाम=व्यवस्था।  ख़िलाफ़त=विरोध ।)

© मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

संपर्कबिलासपुर (छ ग) मो नं 8319743682

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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